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ग्लोबल मंदी का असरः विदेशी धरती पर चमकते थे कांच के उत्पाद अब लागत से टूट रहा उद्योग

Wed, 28 Aug 2019 11:35 AM IST
Abhishek Saxena दीपक जैन, अमर उजाला, फिरोजाबाद
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कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटम - फोटो : अमर उजाला
कांच उद्योग को ग्लोबल मंदी से झटका लगा है। कांच के आयटमों के निर्यात का ग्राफ तीस से चालीस प्रतिशत तक गिर गया है। उत्पादन लागत महंगी होने से सुहागनगरी का कांच उद्योग पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहा है। विश्व बाजार से आर्डर न मिलने के कारण कारोबारियों ने कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटमों का उत्पादन 50 प्रतिशत तक घटा दिया है।
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कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटम - फोटो : अमर उजाला
फिरोजाबाद से कांच के आयटम विश्व के कई देशों में निर्यात किए जाते हैं। मुख्य रुप से क्रिसमस और ईस्टर पर्व के लिए यहां से कांच के कलात्मक आयटम विदेश की धरती पर चमकते हैं। विश्व के कांच बाजार में फिरोजाबाद के कांच उद्योग को सबसे बड़ी चुनौती चायना से मिल रही है। यहां के कांच आयटमों की उत्पादन लागत अधिक होने के कारण विश्व बाजार में टिके रहने की बड़ी चुनौती का सामना कांच उद्योग पहले से कर रहा है ऐसे में मंदी की उछाल से एक्सपोर्ट धड़ाम हो गया है। कांच आयटमों के निर्यातकों के अनुसार तीस से चालीस प्रतिशत तक निर्यात गिर गया है। बाहर से आर्डर नहीं मिल रहे हैं।

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कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटम - फोटो : अमर उजाला
विदेशों में क्रिसमस के साथ-साथ ईस्टर पर्व के लिए काफी आर्डर मिलते रहे हैं। ईस्टर पर पर्यावरण, पशु-पक्षी की आकृतियों से जुड़े कांच आयटमों के साथ-साथ कैंडल के आर्डर काफी मिलते हैं। इन आर्डरों में चालीस प्रतिशत तक गिरावट आई है। प्रमुख निर्यातक मुकेश बंसल टोनी कहते हैं कि अभी तक यूएसए (अमेरिका) में इंडिया से भेजे जाने वाले कांच आयटमों पर टैक्स नहीं लगता था। कांच कारोबारियों को जीएसपी (जर्नलाइज्ड सिस्टम आफ प्रिफेंस) की सुविधा मिलती थी। यूएसए ने जीएसपी फार्म को खत्म करके कांच के अलग-अलग आयटमों पर पांच से तीस प्रतिशत तक टैक्स लगाना शुरू कर दिया है। इससे यूएसए के विभिन्न शहरों में कांच के आयटम बेचने वाले कारोबारी टैक्स स्लैब के आधार पर सात से 15 प्रतिशत तक डिस्काउंट मांग रहे हैं। यहां बने उत्पाद पहले से इतने महंगे हैं कि डिस्काउंट देने की स्थिति नहीं है। 

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कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटम - फोटो : अमर उजाला
हाल ही में वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ) में हुए समझौते के बाद फोकस स्कीम को खत्म कर दिया है। हैंडक्राफ्ट आयटमों पर सात प्रतिशत की मिलने वाली छूट समाप्त कर दी गई है। गेट समझौते में तय किया गया था कि सरकारें फोकस स्कीम के तहत इंसेटिव नहीं देंगी। कांच आयटमों के निर्यातक दीपक गुप्ता कहते हैं कि मंदी का बड़ा असर है। हैंडीक्राफ्ट से जुडे़ कांच आयटमों का उत्पादन पचास प्रतिशत तक घटा दिया गया है। कच्चा माल महंगा है, गैस के रेट बढ़ गए हैं। विश्व बाजार में हमारे उत्पाद कीमतों के कारण टिक नहीं पा रहे हैं। जबकि उत्पादन घटाने के बाद भी कांच कारखानों में खर्च कम नहीं है। अमेरिका, यूरोप के देश बेल्जियम, हॉलैंड, स्वीडन, स्पेन, जर्मनी, डेनमार्क, इटली स्थानों पर सुहागनगरी के कांच उत्पाद निर्यात किए जाते हैं।

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कांच के हैंडीक्राफ्ट आयटम - फोटो : अमर उजाला
ईस्टर पर विदेशों में कांच के हैंडीक्राफ्ट से जुडे़ आयटमों में चिड़िया, फ्लावर पॉट, अंडे के आकार की कलाकृति, मुर्गे, गार्डन के आयटमों की डिमांड रहती है। 500 से 600 करोड़ सालाना है कांच आयटमों के निर्यात का बाजार, सुहागनगरी से कांच आयटमों के निर्यातकों की संख्या 142 है।
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