एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में बेसमेंट-सीढ़ियों के नीचे कचरा और वार्ड में कबाड़ भरा हुआ है। साफ-सफाई चौपट हाल में है। बेड पर चादर तक नहीं है। मरीज-तीमारदारों से पता चला कि 24 घंटे में एक बार ही सफाई होती है।
बाल रोग विभाग की दूसरी मंजिल के तीन वार्ड में कबाड़ भरा हुआ है। एक में मशीन-उपकरण और दो में बेड समेत अन्य का कबाड़ है। बेसमेंट डलावघर बना हुआ है। कचरे को बेसमेंट और इमारत के बाहर फेंका जा रहा है। वार्ड-शौचालय गंदे मिले। यहां गंदगी से तीमारदारों का बुरा हाल है। बच्चों में बीमारी का भी खतरा है। मरीजों के बेड पर चादर नहीं बिछी थी। पूछने पर तीमारदारों ने बताया कि घर से चादर लाकर बिछाते हैं। वार्ड में एक बार ही सफाई होती है। चिकित्सकों से पता चला कि सफाई कर्मचारी सुनवाई नहीं करते।
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मदर्स कक्ष के अंदर भरे उपकरण
- फोटो : अमर उजाला
मदर्स कक्ष पर ताला लगा है, इसके अंदर उपकरण भरे हुए हैं। चिकित्सकों से पता चला कि एनएचएम के तहत मदर्स कक्ष का बजट न आने के कारण यह प्रकल्प शुरू नहीं हुआ है। इसमें बंद उपकरण-मशीन को खराब बताया गया, लेकिन वह नए प्रतीत हो रहे हैं।
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सी़ढ़ियों पर फैला कचरा
- फोटो : अमर उजाला
प्राचार्य डॉ. जीके अनेजा से जब इस संबंध में सवाल-जवाब किए तो उन्होंने कहा। सवाल: बाल रोग विभाग के बेसमेंट में और गेट के बाहर कचरा फेंका जा रहा है। वार्ड में कबाड़ भरा हुआ है। जवाब: वार्ड से कबाड़ हटाकर स्टोर रूम में रखवाने को निर्देशित करता हूं, बेसमेंट में कचरा फेंकने पर सफाई प्रभारी को तलब करूंगा।
सवाल: बेड पर चादर तक नहीं बिछाए जा रहे, मदर्स कक्ष में मशीन-उपकरण भी कबाड़ की तरह भर दिए हैं। जवाब: चादर बिछाने के पहले भी निर्देश दे चुका हूं, फिर भी ऐसा नहीं हो रहा तो स्टाफ नर्स से स्पष्टीकरण मांगता हूं। मदर्स कक्ष में मशीन-उपकरण किस तरह के हैं, इसकी विभागाध्यक्ष से रिपोर्ट मांगूंगा।