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लॉकडाउन: 372 साल में पहली बार ईद पर सूना रहा ताजमहल का आंगन, नहीं हुई नमाज

Tue, 26 May 2020 12:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल में पसरा सन्नाटा - फोटो : Amar Ujala
दुनिया के सात अजूबों में शुमार ताजमहल में 372 साल में पहली बार ईद पर सन्नाटा छाया रहा। सोमवार को ताज की शाही मस्जिद में ईद की नमाज अदा करने के लिए बाहर से कोई नहीं आया। कोरोना संकट के कारण ताजमहल 17 मार्च को बंद कर दिया गया था। लॉकडाउन लागू होने के कारण तब से लगातार बंद हैं।
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ताजमहल में नमाज अदा करते लोग (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
हर बार ईद पर 20 से 25 हजार लोग ताजमहल पर ही नमाज अदा करते थे और इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) सुबह 7 से 10 बजे तक ताजमहल में नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा देता था। सोमवार को ईद की नमाज के लिए ताजमहल नहीं खुला। 
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ताजमहल स्थित मस्जिद के बाहर लोग (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल परिसर के अंदर शाही मस्जिद में पहली बार सन्नाटा देखा गया। केवल सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी ही रही। ताज के तामीर होने के बाद 372 साल में यह पहला मौका है जब ईद पर ताज सूना रहा। ईद पर ताजमहल में सबसे ज्यादा रौनक होती थी। सिर्फ नमाज पढ़ने के लिए ही नहीं, ताज के दीदार के लिए भी बड़ी संख्या में लोग आते थे। 

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ताजमहल के पार्श्व में बहती यमुना नदी - फोटो : अमर उजाला
कर्फ्यू के दौरान भी बाहर से आए थे लोग 
ताजमहल की शाही मस्जिद के इमाम सआदत अली ने बताया कि वो 20 साल से नमाज अदा करा रहे हैं। उनसे पहले उनके वालिद थे। कर्फ्यू के दौरान भी जुमे की नमाज पढ़ी गई थी। ऐसा कभी पहले हुआ ही नहीं कि बाहर से कोई नमाज पढ़ने ताज के अंदर न आया हो। 
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ताजगंज स्थित अहमद बुखारी दरगाह पर नमाज अदा करते लोग - फोटो : अमर उजाला
सआदत अली ने बताया कि ताजमहल में ईद की नमाज खास होती थी। दूर-दूर से लोग आते थे। इस बार मसला कोरोना का है। लोगों का इससे बचाव जरूरी है। लोगों ने घरों में ही ईद की नमाज अदा की। हमने कोरोना से मुल्क के लोगों के बचाव की दुआ की है। 
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ताजमहल की टिकट खिड़की - फोटो : अमर उजाला
युद्ध के समय भी सूना नहीं रहा ताज 
ताजमहल में लंबे समय वरिष्ठ संरक्षक सहायक रहे पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. आरके दीक्षित ने बताया कि 1971 में भारत-पाक युद्ध और 1978 में बाढ़ के समय ताज के तीनों गेट बंद रखे गए थे। तब जुमे की नमाज इमाम और कर्मचारियों ने ही अदा की थी। उस दौर में भी ताज ऐसा सूना नहीं रहा जैसा कोरोना काल में हो गया। 
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