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नेपियर घास है बड़ी खास: एक बार लगाएं, पांच साल तक करें बंपर कमाई; इस युवा किसान का मुनाफा सुन रह जाएंगे हैरान

Tue, 02 Jun 2026 10:57 AM IST
Dhirendra Singh देवेश शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

अंगूठी गांव के युवा किसान ओमप्रकाश सोलंकी ने यूट्यूब से सीखकर नेपियर घास की खेती को व्यवसाय में बदल दिया है और अब वे 10 एकड़ में इसकी खेती से अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। यह घास पशुपालन के लिए पौष्टिक चारे का बेहतर स्रोत बनकर कई राज्यों तक आपूर्ति की जा रही है।
 
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नेपियर घास की खेती - फोटो : अमर उजाला
अंगूठी गांव के युवा किसान ओमप्रकाश सोलंकी ने यूट्यूब से सीखी नेपियर घास की खेती को आय का बेहतर माध्यम बना लिया है। वर्ष 2021 में उन्होंने अपने पशुओं के लिए मात्र 10 बिस्वा जमीन में नेपियर घास लगाकर इसकी शुरुआत की थी। बेहतर परिणाम मिलने पर उन्होंने वर्ष 2025 में इसका रकबा बढ़ाकर 10 एकड़ कर दिया। अब वह प्रति एकड़ सालाना करीब दो लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं और इसके तनों (कलम) की आपूर्ति उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात समेत देश के विभिन्न राज्यों तक कर रहे हैं।

ओमप्रकाश सोलंकी ने बताया कि एक एकड़ में नेपियर घास लगाने पर करीब 20 हजार रुपये की लागत आई थी। अब वह इसके तना (कलम) को अहमदाबाद, गाजीपुर, वाराणसी, प्रयागराज, देहरादून, मेरठ, मुरादाबाद और बुलंदशहर समेत कई शहरों में ट्रेन और बस के माध्यम से भेज रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह न्यूनतम एक हजार कलम का ऑर्डर लेते हैं और एक हजार कलम दो हजार रुपये में उपलब्ध कराते हैं। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के पशुपालन विशेषज्ञ धर्वेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि नेपियर घास (पेनीसेतुम पुर्पुरम) एक बारहमासी उष्णकटिबंधीय चारा फसल है और गर्म जलवायु में इसकी वृद्धि अच्छी रहती है।





 
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नेपियर घास - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसे हाथी घास, सूडान घास और किंग घास के नाम से भी जाना जाता है। इसकी एक बार रोपाई करने पर पांच वर्ष तक हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। यह तेजी से बढ़ने वाली और अधिक उत्पादन देने वाली फसल है। उन्होंने बताया कि नेपियर घास में लगभग 18 प्रतिशत प्रोटीन होता है, जबकि ज्वार में यह मात्रा करीब 10 प्रतिशत रहती है।

 
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किसान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके कारण पशुओं के लिए दाना-दलिया की आवश्यकता भी अपेक्षाकृत कम पड़ती है। इसकी रोपाई मार्च से अगस्त तक जड़दार कल्लों के माध्यम से की जाती है। पहली कटाई रोपाई के 55 से 60 दिन बाद तथा इसके बाद 30 से 35 दिन के अंतराल पर की जानी चाहिए। संवाद

 

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जानकारी देता किसान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक हेक्टेयर में 20-25 टन गोबर खाद लाभकारी
धर्वेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि खेत की तैयारी के लिए एक जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो से तीन जुताई हैरो या कल्टीवेटर से करनी चाहिए। एक हेक्टेयर क्षेत्र में 20 से 25 टन सड़ी गोबर की खाद डालना लाभकारी रहता है। उन्होंने सीओ-4, सीओ-5, बीएनएच-10, पीबीएन-342, बीएनएच-11 और एनबी-21 को इसकी प्रमुख उन्नत किस्में बताई हैं।


 
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जानकारी देता किसान - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सहफसली खेती से वर्षभर मिलता है हरा चारा
धर्वेंद्र सिंह चौहान के अनुसार नवंबर से जनवरी के बीच नेपियर घास के साथ बरसीम और जई की सहफसली खेती करने से वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता बनी रहती है। सर्दियों में नेपियर की वृद्धि धीमी होने के कारण यह तरीका पशुपालकों के लिए लाभदायक साबित होता है।
 
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