नकली करेंसी खपाने का मास्टरमाइंड तजेंद्र सिंह इन दिनों जेल में है। इसी शहर में वर्ष 2017 में वह नकली करेंसी के साथ पकड़ा गया था, उसके बाद भी पुलिस उसका न तो नेटवर्क ध्वस्त कर पायी और न ही उसकी जडे़ं खंगाल सकी। जनपद का खुफिया तंत्र भी उस पर नजर रखने में फेल रहा। जबकि जेल से रिहा होने वाले शातिर अपराधियों पर पुलिस की पैनी नजर रहती है। तजेंद्र ने वर्ष 2017 में स्थानीय निकाय चुनावों में जाली करेंसी खपाने का जाल बिछाया था और इस बार पंचायत चुनावों में बड़ा खेल करने की मंशा थी।
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गिरोह के पास से बरामद 100-100 के जाली नोट
- फोटो : अमर उजाला
नकली नोटों को छापकर उसे जनपद और जनपद से बाहर खपाने के मास्टरमाइंड को वर्ष 2017 में शहर के थाना दक्षिण क्षेत्र स्थित माल गोदाम के पास से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उस समय यूपी में निकाय चुनाव थे। तब पुलिस ने कार से एक लाख 37 हजार रुपये की नकली करेंसी के साथ तजेंद्र सहित तीन लोगों को पकड़ा था जबकि एक साथी भाग गया था। इनमें दो हजार के 68 नोट शामिल थे। डाई, कटर, तार की रोल, प्रिंटर, स्कैनर, लैपटॉप समेत अन्य सामान भी बरामद हुआ था।
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जाली नोट बनाने वाले आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
तजेंद्र सिंह मुख्य रूप से गुरुद्वारा मोतीनगर थाना मोती नगर पश्चिमी दिल्ली का निवासी है। वर्ष 2017 में पुलिस ने उसके साथी इमरान उर्फ लंगड़ा निवासी मोहल्ला नई बस्ती थाना घिरोर मैनपुरी और अजय कुमार उर्फ टिंकू निवासी मोहल्ला नेहरू नगर बिजली घर के पीछे थाना दक्षिण को गिरफ्तार किया था। वर्ष 2019 में वह जेल से बाहर आ गया था। जनपद से वह अपने गैंग का संचालन करता रहा। जेल से बाहर आने के बाद उसने फिर से जाली करेंसी का नेटवर्क खड़ा कर लिया। इस मामले में पुलिस और खुफिया तंत्र फेल साबित हुए।
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आरोपियों के पास से बरामद हुए ये उपकरण
- फोटो : अमर उजाला
पेरोल पर आने के बाद वापस नहीं गया था
वर्ष 2007 में तजेंद्र एक लाख 75 हजार रुपये के नकली नोट के साथ कमला मार्केट नई दिल्ली में पकड़ा गया था। इसके बाद 2012 में तीन लाख 50 हजार रुपये के नकली नोट के साथ थाना विजय विहार नई दिल्ली में पकड़ा गया था। वह वर्ष 2017 में पेरोल पर आया था। समय समाप्त होने के बाद वापस नहीं गया।
वर्ष 2019 में जेल से रिहा होने के बाद तजेंद्र दिल्ली चला गया था। पहले स्थानीय स्तर पर इसकी रिपोर्ट दिल्ली पुलिस को नहीं भेजी गई थी। इस बार इसकी हिस्ट्रीशीट खोलने के लिए दिल्ली पुलिस को पत्र लिखा जा रहा है। क्योंकि यह अधिकांश दिल्ली में ही सक्रिय रहता है। - अजय कुमार, एसएसपी।