कवि रहीम ने आगरा में ही यह दोहा लिखा था, रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। सदियां बीत गईं, हुकमतें बदल गईं। लेकिन यमुना, चंबल और ईशन जैसी विशाल नदियों वाली इस ब्रजभूमि पर जल संकट खत्म होने के बजाय भीषण होता चला गया। कोई नदी नाला बन गई तो कोई सूख चुकी है। भूगर्भ जल स्तर पाताल में जा चुका है। कई जगह पाने के साथ ही नहाने के लिए भी पानी खरीदना पड़ रहा है।
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निजी टैकरों से खरीदते हैं पीने का पानी
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में हजारों लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। आलम यह है कि शहर तो छोड़िए, यमुना किनारे रहने वाले लोग भी दो बूंद पानी को तरस रहे हैं। यमुना पार में लाखों की संख्या में आबादी है। मगर पीने के पानी का संकट बना हुआ है। लोगों की प्यास बुझाने के लिए 130 किमी लंबी पाइप लाइन तो डाल दी गई। मगर जल संस्थान पर इंफ्रास्ट्रेक्चर न होने की वजह से लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
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निजी टैकरों से खरीदते हैं पीने का पानी
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यमुना पार के फाउंड्री नगर, टेड़ी बगिया, ट्रांसयमुना कॉलोनी, सौ फुटा रोड आदि ऐसी कॉलोनी है, जहां के लोग निजी टैंकरों के भरोसे ही जीवन यापन कर रहे हैं। निजी टैंकर एक बाल्टी के चार रुपये, ड्रम के 30 रुपये और पूरा टैंकर 700 रुपये का मिलता है। वहीं पीने का फिल्टर वाटर अलग से लेना होता है। इसके अलावा बोदला, शाहगंज, जगदीशपुरा, गढ़ी भदोरिया, सेवला जाट, अलबतिया, सराय मलूकचंद, गोबर चौकी में पेयजल संकट बना हुआ है।
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खरीद कर पानी पीते हैं लोग
- फोटो : अमर उजाला
कान्हा की नगरी मथुरा में शहर से लेकर गांव तक खारा पानी है। मीठे पानी के लिए सुबह से शुरू होने वाली दौड़ शाम तक चलती है। कहीं गांव से दूर लगे इंडिया मार्का के हैंडपंप पर लाइन नजर आएगी तो कहीं कुएं पर। महानगर को पानी की सप्लाई गोकुल बैराज से की जाती है लेकिन इसका पानी पीने योग्य नहीं है। 70 एमएलडी पानी महानगर को चाहिए लेकिन मिल रहा है केवल 10 एमएलडी। इस हिसाब से आधी आबादी तो प्यासी ही रह जाएगी।
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पीने का पानी ले जाती महिला और युवती
- फोटो : अमर उजाला
यूं तो पूरे मथुरा जिले में ही पानी की किल्लत है लेकिन सबसे प्रभावित वाले क्षेत्र मथुरा महानगर और आसपास के गांव भी हैं। चौमुहा, फरह, गोवर्धन, नंदगांव, बरसाना, छाता के साथ ही कई इलाके ऐसे हैं जहां गांव से दूर करीब दो किलोमीटर से पानी लाना पड़ता है। सुबह ही महिलाएं पानी के लिए निकल जाती हैं। महानगर में ही वाल्मीकि बस्ती भरतपुरगेट, रानी मंडी, मछली मंडी, मुर्गा फाटक, धौली प्याऊ, मानस नगर, कृष्ण विहार, वाल्मीकि बस्ती वृंदावन के अलावा गांवों में भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं है ।
फिरोजाबाद जिले में हैंडंपप तो अतीत की बात होते जा रहे हैं। फिरोजाबाद, शिकोहाबाद, अरांव और हाथवंत ब्लाक डार्क जोन का दंश झेल रहे हैं। टूंडला, नारखी और हाथवंत ब्लाक के कई गांव में पानी खारा है। फिरोजाबाद शहर में 100 से 125 मीटर तक जलस्तर पहुंच गया है। नगर निगम ने डीप बोर नलकूप लगवाए हैं। लगातार घटते जलस्तर से हैंडपंप भी जवाब दे गए हैं। जलनिगम के 38 हजार से अधिक हैंडपंप हैं, परंतु जलस्तर गिरने के कारण करीब 4700 हैंडपंप खराब हैं।