फतेहाबाद के गढ़ी सारंगपुर के राम खिलाड़ी अपने डीपू गधे के साथ बटेश्वर मेले में पहुंचे हैं। उनका गधा आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और इसकी कीमत भी लोगों को हैरान कर रही है। डीपू की कीमत 4.50 लाख रुपये है। इसके साथ ही इसकी खुराक भी चौंकाने वाली है। उसे रोजाना चना, काजू, बादाम खाने में दिए जाते हैं। बटेश्वर मेले में खच्चर की नस्ल पैदा करने के लिए डीपू लाया गया हैं। जानिये पूरी खबर अगली स्लाइड में...
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डीपू
- फोटो : अमर उजाला
अमृतसरी नस्ल के डीपू को तीन साल पहले उन्होंने तीन लाख रुपये में खरीदा था। बटेश्वर मेले में इसकी कीमत 4.50 लाख रुपये रखी गई है। हालांकि बदायूं के रमेश मंगलवार को इसके लिए 3.50 लाख रुपये देने को तैयार थे। डीपू के माध्यम से खच्चर की नस्ल तैयार होती है। राम खिलाड़ी ने बताया कि रोजाना चना और सूखे मेवे देते हैं। सप्ताह में एक बार घी भी पिलाया जाता है। बताया कि बटेश्वर मेले के अलावा अलीगढ़, दाऊजी, कासगंज, गढ़गंगा मेलों में भी घोड़ी को क्रास कराने के लिए वह डीपू को ले जाते हैं। घोड़ी क्रास करने से हर रोज उन्हें करीब दो हजार रुपये की आमदनी हो जाती है।
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बटेश्वर मेले में अपने खच्चरों के साथ युवक
- फोटो : अमर उजाला
बद्रीनाथ, केदारनाथ, अमरनाथ, वैष्णो देवी की चढ़ाई पर श्रद्धालुओं की ढुलाई के लिए खच्चरों का इस्तेमाल होता है। बटेश्वर में खच्चरों का मेला लगते ही पहाड़ों की चढ़ाई के लिए उम्दा नस्ल के खच्चरों को खरीदने के लिए व्यापारी भी पहुंचते हैं। दाऊजी के श्याम बिहारी की खच्चरों की जोड़ी की कीमत 2.75 लाख रुपये है। उन्होंने 2.50 लाख रुपये तक में इसे बेचने से इंकार कर दिया। वहीं वीरू ने एक खच्चर 1.30 लाख रुपये में खरीदा। मेले में 60 से लेकर 95 हजार तक के खच्चर खूब बिक रहे हैं। मेले में पहुंचे खरीदारों ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में खच्चर रोजी-रोटी का इकलौता सहारा हैं। माल ढुलाई के अलावा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की चढ़ाई की एवज में अच्छी खासी कमाई हो जाती है।
मेले में मंगलवार को घोड़ी खरीदने पहुंचे फतेहाबाद के विधायक जितेंद्र वर्मा ने मेले की बदहाली पर चिंता जताई। क्षेत्रीय दायरे में सिमटते उत्तर भारत के प्रमुख मेले के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की बात कही। इससे पहले पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह, बाह की विधायक पक्षालिका भी मेले के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए जिला प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी सौंपे जाने की वकालत कर चुके हैं। वहीं मंगलवार को कन्नौज के व्यापारी मोहम्मद उस्मान की 25 लाख कीमत की नकुली घोड़ी विधायक जितेन्द्र वर्मा को पसंद आई। पर, उन्हें दो घोड़ी चाहिए थी। मोहम्मद उस्मान ने गढ़मुक्तेश्वर के मेले से अच्छी नस्ल की घोड़ी की जोड़ी देने का भरोसा दिलाया। इस पर वह बगैर खरीदारी किए ही लौट गए।
कुएं में गिरे ऊंट को क्रेन से निकाला गया
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर में तीसरे चरण में लगे खच्चरों के मेले में भी बदइंतजामी ही है। प्रकाश, पानी का इंतजाम नहीं किया जा सका है। रात अंधेरे में गुजारने वाले व्यापारियों को दिनभर मेले में धूल से भी जूझना पड़ रहा है। पीने के लिए पानी भी टैंकरों से आ रहा है। जानवरों के इलाज के लिए शिविर भी नहीं लग सके हैं। इससे व्यापारियों और किसानों में रोष है। यहां एक ऊंट रात के अंधेरे में कुएं में गिर गया। जिसे क्रेन की मदद से निकाला गया।