आगरा में भगवान भोले की आराधना के पर्व महाशिवरात्रि की धूम है। शहर के शिवालयों में बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं। एक साल बाद प्रशासन ने मंदिरों को खोलने की अनुमति दे दी है। इससे भक्तों में अपार उत्साह है। गुरुवार तड़के से ही शिव मंदिरों में भगवान शिव के जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो गया। सोरों और राजघाट से कांवड़ लेकर आने वाले कांवड़ियों ने गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया।
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मनकामेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्वालुओं की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि के अवसर पर शहर के प्राचीन शिवालाय मन:कामेश्वर मंदिर, राजेश्वर महादेव मंदिर, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर और बलकेश्वर महादेव मंदिर में सुबह चार बजे से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी है। मंदिरों के बाहर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। अन्य शिवालयों में भी भारी भीड़ रही।
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मनकामेश्वर मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
शिव भक्तों ने विधि-विधान से जलाभिषेक कर भगवान भोले की आराधना की। हर कोई शिव की भक्ति में सराबोर दिखाई दिया। मंदिर परिसर बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते रहे। महाशिवरात्रि पर मंदिरों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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महाशिवरात्रि पर बटेश्वर में उमड़ी भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
महाशिवरात्रि पर ब्रज की काशी कहा जाने वाला बटेश्वर भी बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठा। सोरों से कांवड़ लेकर भोलेनाथ के भक्त यहां पहुंचे। बता दें कि बटेश्वर में यमुना तट पर 101 शिव मंदिरों की श्रृंखला है। कहा जाता है कि यहां अज्ञातवास में पांडवों ने भगवान शिव की आराधना की थी।
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महाशिवरात्रि पर पूजा करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
जलाभिषेक का है बड़ा महत्व
आगरा के सिद्धि विनायक मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री बताते हैं कि महाशिवरात्रि की पूजा फलदायी है। इस दिन भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करने का बड़ा महत्व है। गंगाजल से अभिषेक इसलिए किया जाता है कि क्योंकि भगवान शिव की जटाओं में गंगा का वास है।
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आगरा शहर के मध्य स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर
महाशिवरात्रि पर बन रहा धनिष्ठा व श्रीवत्स योग
महाशिवरात्रि का त्योहार धनिष्ठा एवं शतभिषा नक्षत्र, श्रीवत्स योग, शिव योग, सिद्धा योग में मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय का कहना है कि इस दिन भगवान शिव के अनेक रूप शंकर, रुद्र, महाकाल, महादेव, भोलेनाथ, त्रिनेत्र आदि अनेक रूपों में पूजा की जाती है।
बटेश्वर में लगी कांवड़ियों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
प्रदोष काल में करें पूजा
श्री शिव पुराण में वर्णित है कि भगवान महादेव सृष्टि का सृजन और प्रलय प्रदोष बेला में ही करते हैं। पूजा, रुद्राभिषेक का सर्वोत्तम फल प्राप्ति योग प्रदोष काल में ही है। इस भगवान शिव व पार्वती का विवाह हुआ था। इसलिए मंदिरों में शिव विवाह संपन्न होते हैं।