एसएन मेडिकल कॉलेज में व्यवस्थाएं दिनों दिन ध्वस्त होती जा रही हैं। कहीं इमरजेंसी से मरीज को भगा दिया जाता है तो नर्सिंग स्टॉफ की लापरवाही हद दर्जे की होती है। प्रसूता को गेट पर ही छोड़ दिया जाता है। पिनाहट निवासी रचना का प्रसव के बाद हालत बिगड़ने पर नई सर्जिकल बिल्डिंग स्थित आईसीयू में इलाज चल रहा था। हालत सामान्य होने पर मंगलवार को वार्ड में शिफ्ट करने के लिए नर्सिंग स्टाफ गेट पर ले आए और बोले कि एंबुलेंस लेकर आते हैं। प्रसूता गेट पर ही स्ट्रेचर पर पड़ी रही। रिश्तेदार की गोद में नवजात था। डेढ़ घंटा हो गया, लेकिन एंबुलेंस नहीं आई और नहीं स्टाफ लौटकर आया। इधर, प्रसूता की तबियत खराब होने लगी।
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एसएन मेडिकल कालेज
- फोटो : अमर उजाला
उसने दर्द की शिकायत की, इस पर तीमारदार ने पास से गुजर रहे चिकित्सकों को स्थिति बताई। उन्होंने संबंधित चिकित्सक के पास ले जाने को कहा। दर्द से कराहते देख रिश्तेदार ने गार्ड को जानकारी दी। बाद में गार्ड ने अन्य तीमारदारों की मदद से आईसीयू में भर्ती करवाया।
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एसएन मेडिकल कॉलेज से बाहर निकलते मरीज
- फोटो : अमर उजाला
बरौली अहीर निवासी कप्तान सिंह चाहर के पसली में मवाद भर गया था। तीन दिन पहले एसएन इमरजेंसी के चिकित्सकों को दिखाया था। उन्हें नौ जुलाई की सुबह नौ बजे आपरेशन के लिए बुलाया था। परिजन रिपोर्ट और पर्चे लेकर इमरजेंसी पहुंच गए। पर्चा देखकर जूनियर डाक्टरों ने उसे भर्ती कर लिया, लेकिन काफी देर तक डॉक्टर नहीं आया। मरीज का दर्द बढ़ रहा था। भाई ओमकांत चाहर का आरोप है कि करीब चार घंटे तक आपरेशन करने वाले डॉक्टर नहीं आए। इमरजेंसी में मौजूद जूनियर डॉक्टरों से पूछने पर वह झल्ला गए और अभद्रता करने लगे। विरोध किया तो बोले इतनी जल्दी है तो कहीं और इलाज करा लो। इतना कहते हुए उन्हें भगा दिया।
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एक हाथ में एक्सरे और दूसरे से बीमार महिला को संभालते परिजन
- फोटो : अमर उजाला
बारिश के दौरान यहां और भी अधिक अव्यवस्थाएं फैल जाती हैं। मरीजों को ले जाने के लिए स्ट्रेचर के साथ साथ स्टॉफ भी नहीं मिलता है। हड्डी रोग के मरीजों को तीमारदार अपने ही कंधों पर चिकित्सकों को दिखाने के लिए मजबूर होते हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज में बीमार महिला को ऑटो से ले जाने की जद्दोजहद करते परिजन
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मरीजों को ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं मिलती हैं। ऐसे में तीमारदार ऑटो से मरीज को ले जाते हैं। फिर चाहे कितनी भी परेशानी हो। प्राचार्य डॉ जीके अनेजा का कहना है कि किस डॉक्टर ने मरीज को आपरेशन के लिए बुलाया था और क्यों देरी हुई, इसकी जांच कराई जाएगी। इमरजेंसी प्रभारी से भी इसकी रिपोर्ट मांगेंगे।