हर साल 17 जून को मगरमच्छ के संरक्षण के प्रयास और इनके प्रति लोगों को जागरूक करने उद्देश्य से विश्व मगरमच्छ दिवस मनाया जाता है। दुनिया में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचे मगरमच्छ चंबल नदी में बढ़ रहे है। छह साल में यहां इनकी संख्या 454 से बढ़कर 882 करीब दोगुनी हो गई है। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में होकर बहने वाली चंबल नदी को 1979 में मगरमच्छ और घड़ियाल के संरक्षण के लिए चुना गया था। जो इन जलीय जीवों को रास भी आ रही है। वार्षिक गणना रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में 454, 2017 में 562, 2018 में 613, 2019 में 706, 2020 में 710, 2021 में 882 मगरमच्छ चंबल नदी में मिले। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि चंबल नदी में मगरमच्छ बढ़ने के साथ ही मानव मगरमच्छ संघर्ष की घटनाएं बढ़ने का खतरा रहता है। बाह रेंज में नदी किनारे के ग्रामीणों को इसके लिए जागरूक कर संरक्षण को प्रेरित करने अभियान चलता है।