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जवाहरबाग कांड: मुख्य आरोपी रामवृक्ष जिंदा है या मर गया, तीन साल बाद भी कोई प्रमाण नहीं

Sat, 01 Jun 2019 07:20 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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फाइल फोटो
मथुरा के जवाहरबांग कांड के तीन साल हो गए, लेकिन अभी तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। जांच एजेंसियां तो यह पता भी नहीं लगा सकी हैं कि मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव जिंदा है या मर गया? क्योंकि उसकी मौत का कोई भी वैज्ञानिक आधार न सीबीआई के पास है और न ही पुलिस के पास। प्रदेश ही नहीं देश भर की सियासत में आग लगाने वाले जवाहरबाग कांड को आज भी लोग भूल नहीं पाए हैं।
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अपने परिवार के साथ तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी (फाइल)
2 जून 2016 को जवाहरबाग में हिंसा हुई थी जिसमें तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष की जान चली गई थी। घटना में 27 कब्जाधारियों की भी मौत हुई थी, लेकिन जवाहरबाग कांड की जांच बेहद सुस्त तरीके से हो रही है। पहले तो पुलिस ने ही हीलाहवाली की, लेकिन अब सीबीआई भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। 
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फाइल फोटो
जवाहरबाग में जिन 9 लोगों के जले शव मिले थे उनकी पहचान नहीं हो पाई। मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव मारा गया, यह पुलिस अपने रिकॉर्ड में बता रही है। लेकिन कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक नहीं है। पुलिस ने जिस शव को रामवृक्ष का बताकर उसका डीएनए लिया था, उसका मिलान उसके बेटे के डीएनए से हो नहीं पाया था। सीबीआई भी अपने स्तर से डीएनए की जांच करा रही है।  

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
रामवृक्ष यादव गाजीपुर के गांव बाघपुर का रहने वाला था। उसने 11 जनवरी 2014 को मध्यप्रदेश के सागर जिले से सत्याग्रह यात्रा शुरू की थी। फरवरी 2014 में रामवृक्ष यादव मथुरा पहुंचा और समर्थकों के साथ 280 एकड़ के जवाहरबाग पर कब्जा कर लिया था। जवाहरबाग खाली कराने को लेकर 2 जून 2016 को हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में 101 लोगों को जेल भेजा गया था। जेल में बंद तीन आरोपियों की बीमारी के चलते मौत हो गई। अभी तक 12 लोगों को जमानत मिल चुकी है।
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फाइल फोटो - फोटो : Amarujala
जवाहरबाग हिंसा के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उस वक्त शासन ने कहा था कि मार्च 2014 से जून 2016 तक जो भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रहे उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। तत्कालीन डीएम, एसएसपी, एसपी सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट और पुलिस क्षेत्राधिकारियों के बयान भी हो चुके लेकिन जांच आगे नहीं बढ़ सकी। 
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