आगरा की पॉश कॉलोनी पांडव नगर में कारोबारी रोहित धूपड़ की पत्नी रितु (38) और बेटियों कायरा (3) तथा सचिका (6) की रहस्यमय मौत का मामला अभी तक सुलझ नहीं पाया है। एफआईआर हत्या की धारा में दर्ज हैं जबकि एक भी साक्ष्य जान लिए जाने का नहीं मिला है। पुलिस 25 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। नौकरानी से पूछताछ हो चुकी है, लेकिन दो महीने की जांच में आत्महत्या जैसी भी कोई बात सामने नहीं आई है। नजरें फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट पर हैं जिसके आने में न जाने क्यों देरी पर देरी हो रही है?
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मृतक मां-बेटियों के फाइल फोटो
रितु, कायरा और सचिका के शव 24 फरवरी की शाम घर के ही बाथरूम में मिले थे। घर का मेन गेट अंदर से बंद था। तीनों नहाने की अवस्था में थीं। बालों में शैंपू लगा था। पहली नजर में तो पुलिस ने यही माना कि दम घुटने से तीनों की जान गई है। गैस गीजर के पाइप से गैस लीक हो गई थी? सिलिंडर खाली था। लेकिन कुछ सवालों ने गुत्थी को उलझा दिया। इसके बाद रितु के मायके वालों ने हत्या का केस भी दर्ज कर दिया। इसी से पुलिस को जांच करनी पड़ी।
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मृतकों के फाइल फोटो
पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि उस दिन घर में रितु और कायरा ही थीं। दोपहर को नौकरानी आई, लेकिन वो सफाई करके चली गई थी। रितु दोपहर को घर से कुछ देर के लिए बाहर गई लेकिन वह एलोविरा जूस खरीदकर वापस आ गई थी। इसका अर्थ यह है कि मामला हत्या का नहीं है।
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फाइल फोटो
जांच अधिकारी राजेश्वर त्यागी ने बताया कि अभी तक की जांच में कोई ऐसी ठोस जानकारी नहीं मिली है जिससे केस का पूरा खुलासा हो सके। अब पूरी जांच फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी है।
इन लोगों के दर्ज किए गए बयान
- रितु के मायका पक्ष के सदस्य
- रितु के ससुराल पक्ष के सदस्य
- रोहित धूपड़ के पड़ोस में रहने वाले लोग
- रोहित के घर काम करने वाली नौकरानी
- वो दुकानदार जिससे रितु एलोविरा खरीद कर ले गई थी
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फाइल फोटो
इन तीन सवालों के जवाब भी अभी तक नहीं ढूढ़ पाई पुलिस
गेट क्यों नहीं खोल पाई रितु ?
पुलिस के अफसर इस सवाल में उलझ गए कि क्या गीजर से निकली गैस इतनी खतरनाक होती है कि इंसान की जान चली जाए और उसे भागने का
मौका भी न मिले।
एग्जॉस्ट फैन के होते दम कैसे घुटा ?
पुलिस की जांच का दूसरा सवाल यह है कि जब बाथरूम में एग्जास्ट फैन लगा था, तो दम कैसे घुट सकता है। हालांकि फैन चल नहीं रहा था।
क्या मरने से पहले चीख भी नहीं पाई रितु
पुलिस आसपास के लोगों से यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या मौत के आगोश में जाने से पहले रितु की चीख निकली थी या नहीं।
विसरा जांच में देरी पर उठ रहे सवाल
आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में विसरा जांच 15 दिन से एक महीने के भीतर हो जाती है। इस केस में पुलिस की ओर से प्राथमिकता के लिए कहा गया था। इसके बावजूद दो महीने में रिपोर्ट न आने पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर इस देरी की क्या वजह हो सकती है? इस पर कोई जवाब भी पुलिस को नहीं दिया जा रहा है। इंस्पेक्टर शाहगंज थाना का कहना है कि कई बार मैसेंजर को लैब भेजा जा चुका है, रिपोर्ट नहीं मिली है।