फतेहाबाद के गांव परतापुरा में सेप्टिक टैंक की जहरीली गैस से मंगलवार शाम को पांच युवकों की मौतों के बाद गांव परतापुरा में कोहराम मचा हुआ है। बुधवार सुबह लाशें उठते ही गांव में चारों तरफ चीत्कार मच गई। करुण क्रंदन गूंजने लगा। हर आंख नम हो गई। मानों ऐसा लग रहा था कि आंखों से आंसुओं का सैलाब आ गया हो। फतेहाबाद के जोनेश्वर घाट पर एक साथ पांच चिताएं जलीं। उधर, तीन बेटों की मौत से पिता सुरेंद्र और मां राधा बेसुध हैं। मां का कलेजा ही फटा जा रहा था। उन्हें परिवार की महिलाएं किसी तरह संभाल रही थीं। आगे की स्लाइड में पढ़िए पूरी दर्दनाक घटना...
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आगरा में हादसा: शौचालय के गड्ढे में जान गंवाने वालों के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि फतेहाबाद क्षेत्र के गांव परतापुरा निवासी सुरेंद्र पुत्र किरोड़ी लाल के घर के बाहर तीन दिन पहले शौचालय का सेप्टिक टैंक (सोखता) बनाने के लिए गड्ढा खोदा गया था। इस गड्ढ़े से तीन फीट की दूरी पर पुराना सेप्टिक टैंक भी था। यह भरा हुआ था। सुरेंद्र गड्ढे को पक्का नहीं करवा सके थे। खेत पर काम कर रहे थे। गड्ढे में पुराने टैंक से गंदा पानी आ गया था। जहरीली गैस का रिसाव हो गया था। मंगलवार को पानी रोकने के लिए सुरेंद्र का बेटा अविनाश (16) उतरा था। जहरीली गैस से वह गड्ढे में ही गिर पड़ा था। उसे बचाने को गड्ढे में उतरे हरिमोहन (17), अनुराग (14), चचेरा भाई सोनू (30) भी बेहोश हो गए। बाद में पड़ोसी योगेश बघेल उतरा था। वह भी गैस की चपेट में आ गया। पांचों को ग्रामीणों ने निकाला था। इसके बाद अस्पताल ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। देर रात पुलिस ने मृतकों के शवों के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई। गांव में पांचों के शव पहुंचते ही कोहराम मच गया। बुधवार सुबह आठ बजे गमगीन माहौल में पांचों की लाशें उठाई गईं। इसके बाद परिजन शवों को जोनेश्वर घाट पर ले गए। चार भाई अविनाश, हरिमोहन, अनुराग, सोनू को मुखाग्नि भाई मोनू ने दी, जबकि योगेश को मुखाग्नि भतीजे आशीष ने दी। पांच चिताएं एक साथ जलीं।
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हादसे के बाद बेसुध मां
- फोटो : अमर उजाला
मां राधा और पिता सुरेंद्र ने एक नहीं, बल्कि तीन बेटों को एक साथ खो दिया। 15 मिनट में उनकी दुनिया ही उजड़ गई। उनका वंश भी नहीं बचा। सुरेंद्र और राधा के आंसू सूख चुके हैं। वह दोनों बेसुध हो गए हैं। रिश्तेदार किसी तरह दोनों को संभाल रहे हैं। मां जब भी बोलती हैं तो एक ही बात कहती है कि बेटों को कोई लौटा दे। अपनी गोद में उठा लेंगी। फिर कभी अपने पास से दूर नहीं जाने देंगी। भगवान तुमने ऐसा क्यों कर दिया। अब कौन उनका सहारा बनेगा। मां के आंसुओं को देखकर गांव परतापुरा में हर आंख नम हो गई। यही कुछ हाल योगश और सोनू के घरवालों का भी था। पांच बच्चों की मौत से गांव में बुधवार को भी चूल्हे नहीं सुलगे। हर कोई इस भयावह हादसे को याद करके सिहर उठता है।
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उमाशंकर और मोनू ने गड्ढे से निकाले पांचों
- फोटो : अमर उजाला
उमाशंकर और मोनू ने गड्ढे से निकाले पांचों
पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद गांव परतापुरा निवासी उमाशंकर ने बताया कि हादसे की जानकारी पर पहुंच गए। उन्हें पहले पता था कि सेप्टिक टैंक में गैस बनती है। यह जहरीली होती है। पुराने कुएं की सफाई के बारे में वह जानते थे। सबसे पहले खाली बाल्टी रस्सी से बांधकर डाली जाती थी। ऐसा करने से कुएं में बनी गैस की परत टूट जाती थी। गड्ढे में पांचों बच्चों के गिरने पर पर ऐसा ही किया। खाली बाल्टी से पानी हिलाया। इसके बाद बाल्टी बाहर निकाल ली। इसके बाद मरने वाले सोनू के भाई मोनू की कमर में रस्सी बांध दी। वह नीचे उतरा। वह नीचे गया। इसके बाद सब को निकाला। उमाशंकर का कहना था कि पांचों के गिरने के बाद जानकारी मिली थी। अगर, पहले वाले के बेहोश होने पर ही पता चल जाता तो वह बाकी को नीचे नहीं उतरने देते।
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आगरा में हादसा: इसी शौचालय के गड्ढे में गईं पांच की जान
- फोटो : अमर उजाला
दम घुटने से हुई पांचों की मौत
पुलिस ने देर रात पांचों के शवों का पोस्टमार्टम कराया था। एसपी पूर्वी के वेंकट अशोक ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण जहरीली गैस से होना आया है। जहरीली गैस से पांचों का दम घुट गया। शरीर में आक्सीजन की कमी होने की वजह से पांचों की मौत हो गई। साढ़े पांच बजे यह घटना हुई थी। पांचों की मौत में 15 मिनट का समय लगा। उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।
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आगरा में हादसा: गड्ढे में गिरे बच्चे को बचाने में हुई पांच की मौत (मृतकों के फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
वो दर्दनाक पल
- शाम 5:00 बजे सुरेंद्र का पुत्र अनुराग खेलते खेलते गड्ढे में गिरा
- शाम 5:02 बजे उसके भाई हरिमोहन और अविनाश गड्ढे में उतरे।
- शाम 5.10 बजे सोनू गड्ढे में उतरा।
- शाम 5:15 बजे योगेश गड्ढे में कूदा।
- शाम 5:30 बजे ग्रामीणों ने सभी को बाहर निकाला।
- शाम 5:45 बजे इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
- शाम 6:00 बजे योगेश की मौत, अन्य को ले गए अस्पताल।
- शाम 6:30 बजे क्षेत्रीय विधायक जितेंद्र वर्मा मौके पर पहुंचे।
- शाम 7:00 बजे अनुराग समेत अन्य चार की मौत की सूचना गांव पहुंची।
- शाम 7:05 बजे एसपीआरए पूर्वी के वेंकट अशोक मौके पर पहुंचे।
शौचालय के गड्ढे में जान गंवाने वाला सोनू का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
योग सिखाता था सोनू
हादसे में सुरेंद्र शर्मा के पड़ोस में रहने वाले चचेरे भाई रामसेवक शर्मा के बेटे सोनू शर्मा की भी मौत हुई है। भाई मोनू शर्मा ने बताया कि पिता रामसेवक की मौत हो चुकी है। भाई सोनू पढ़ाई में तेज था। उसने बीएससी के बाद हरिद्वार में योग पीठ से योग में पीएचडी की थी। उसकी शादी नहीं हुई थी। घरवाले उसका रिश्ता तय करने की सोच रहे थे। वह फिरोजाबाद स्थित यूनानी अस्पताल में योग ट्रेनर था। रोजाना अस्पताल गांव से जाता था। गांव मेें वह हर किसी की मदद करता था। चचेरे भाइयों को बचाने के लिए वह आया था। मगर, मौत ने उसे भी अपने आगोश में ले लिया। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है। सोनू के बड़े भाई रामकुमार, श्याम सुंदर और छोटा मोनू है। उनकी एक बहन नीरज है।