उत्तर प्रदेश के एटा में प्रेम कहानी का खौफनाक अंत हुआ। दोनों को एक दूसरे से प्यार हुआ और प्यार को हासिल करने के लिए दोनों ने दुनिया से लंबी जंग लड़ी। धीमे धीमे सबकुछ ठीक हुआ। जिसके बाद उनकी जिंदगी सामान्य तरीके से चलने लगी। लेकिन पांच साल की इस सुखद प्रेम कहानी का अंत सोमवार को दोनों की खौफनाक मौत के रूप में हुआ। आशंका के आधार पर रिपोर्ट तो दर्ज करा दी गई है। लेकिन यह क्यों हुआ और किसने किया? यह अभी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता। आशंकाओं के जवाब इस प्रेम विवाह में ही तलाशे जा रहे हैं।
जितेंद्र के परिवार के भाई गौरव के मुताबिक करीब पांच साल पहले जितेंद्र गांव खेरिया स्थित एक विद्यालय में पढ़ने जाता था। वहां से इंटरमीडिएट कर रहा था। इसी विद्यालय में पढ़ने वाली गांव नगला जट्टा निवासी प्रीति पढ़ाई के दौरान उसके संपर्क में आई। दोनों के बीच प्रेम संबंध हो गए। बात परिवार वालों तक पहुंची। लेकिन प्रीति के परिवार के लोग शादी के लिए राजी नहीं थे। 2018 में दोनों लोग साथ में कहीं चले गए। जहां उन्होंने कोर्ट मैरिज कर ली।
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Double Murder in etah
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद प्रीति के परिवार वालों ने काफी कानूनी कार्रवाई की। वह पूरी तरह इस शादी के खिलाफ थे। हालांकि इस कानूनी लड़ाई में जितेंद्र और प्रीति की जीत हुई और साल भर बाद आकर गांव में रहने लगे।
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इस बीच जितेंद्र के पिता की मौत हो गई। जिसके बाद जितेंद्र ने बैल्डिंग का अपना अलग काम डाल लिया। तीन साल पहले दोनों को पुत्र हुआ तो उनकी खुशियां कई गुना बढ़ गई थीं। भविष्य को लेकर तमाम सपने वो लोग सजाए हुए थे। लेकिन किसे पता था कि उनका और उनके सपनों का इतनी बेरहमी से कत्ल कर दिया जाएगा।
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अपनी पढ़ाई छोड़ी, पत्नी बनी प्रेमिका को पढ़ाता रहा जितेंद्र
यूं तो जितेंद्र पढ़ने-लिखने में होनहार था। लेकिन प्रेम विवाह के बाद हालात ऐसे बने कि पढ़ाई छूट गई। इंटरमीडिएट करने के बाद उसे परिवार चलाने के लिए रोजगार में लगना पड़ा। लेकिन पत्नी को वह पढ़ाता रहा। दोनों एक-दूसरे के संपर्क में इंटर की पढ़ाई के दौरान आए। इंटर होने के बाद दोनों ने प्रेमविवाह कर लिया। इच्छा तो जितेंद्र की और आगे पढ़ने की थी। लेकिन परिजनों के विरोध के चलते एक साल घर से दूर रहना पड़ा। लौटकर आया तो परिवार की जिम्मेदारी कंधों पर थी।
ऐसे में पढ़ाई भला कैसे हो पाती? अपनी इच्छाओं का गला घोंट लिया और काम में जुट गया। लेकिन तय किया कि खुद भले ही नहीं पढ़ पा रहा, पत्नी की पढ़ाई बंद नहीं होने देगा। मारहरा के एक डिग्री कॉलेज में प्रीति को बीएससी में प्रवेश दिलाया। यह उसका बीसससी का अंतिम वर्ष था। जिसकी परीक्षा और परिणाम से पहले ही प्रीति की दुनिया छूट गई।