आगरा दयालबाग निवासी 50 वर्षीय महिला के पति एचआईवी संक्रमित है। उनके दोनों गुर्दे खराब हैं। डायलिसिस कराने के लिए पैसे नहीं हैं। मुख्यमंत्री कोष से सहायता की फरियाद लेकर बुधवार सुबह 10 बजे वह कलक्ट्रेट पहुंची। लेकिन यहां ताले लटके मिले। वह मायूस होकर घर लौट गई। कोविड आपातकाल में जन समस्याओं का निस्तारण 46 दिन से बंद है। पुरानी समस्याएं सुलझी नहीं हैं। 27 मार्च से समाधान दिवस, थाना दिवस, आईजीआरएस पोर्टल व जिलाधिकारी कार्यालय में अब तक की गईं 485 फरियादें अधूरी हैं। नई समस्याओं को दर्ज नहीं किया जा रहा। ऐसे में मरीज मुसीबत में दर-दर भटकने को मजबूर हैं। दयालबाग निवासी महिला ने बताया कि उसके पति को डायलिसिस के दौरान संक्रमित रक्त चढ़ने से एचआईवी का संक्रमण हो गया। शहर के किसी अस्पताल में डबल फिल्टर मशीन नहीं होने के कारण उनकी डायलिसिस नहीं हो पा रही। अलीगढ़ के एक निजी अस्पताल में सुविधा है लेकिन वहां इलाज कराने के लिए पैसा नहीं है। पिछले पांच दिन से सीएमओ, कलक्ट्रेट और अस्पतालों के चक्कर काट रही हूं। मुख्यमंत्री सहायता योजना से मदद के लिए जिलाधिकारी कार्यालय आई, लेकिन यहां दफ्तरों में ताले लटके मिले।