ब्रज में छठ का महापर्व धूमधाम से मनाया गया। आगरा-मथुरा में रविवार की सुबह यमुना घाटों पर सैकड़ों व्रती महिलाओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही चार दिवसीय आस्था का महापर्व संपन्न हो गया। महिलाओं ने परिवार की सुख समृद्धि के लिए छठी मइया से कामना की। पूजन के साथ गीतों 'पटना के हवीं पाटन देवी, आगरा अइसन घाट, उतरले सूरज देव भइले अरघिया के जून...' 'पूजेली चरण तोहार हे छठी मइया' आदि के जरिये छठी मैया के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
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आगरा में यमुना घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
छठ महापर्व के अंतिम दिन भगवान भास्कर और छठी मइया की उपासना के लिए यमुना के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कोई दंडवत करते तो कोई सिर पर प्रसाद की टोकरी रखे नंगे पैर घाट पर पहुंचा। विधिविधान से छठी मइया की पूजा की। यमुना में डुबकी लगाई और उदयमान (उगते हुए) सूर्य को अर्घ्य दिया।
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यमुना घाट पर छठ मइया की पूजा करते श्रद्धालु
- फोटो : अमर उजाला
बल्केश्वर, रामबाग, कैलाश, हाथीघाट और दशहरा घाट पर व्रती महिलाएं तड़के चार बजे से ही पहुंचने लगीं। इनके साथ बच्चे और परिवार के बाकी लोग भी थे। इन्होंने पूजन में सहयोग किया। यमुना मैया की गोद में खड़ी, मांग से लेकर पूरी नाक तक सिंदूर लगाए महिलाओं के चेहरे से तेज झलक रहा था।
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यमुना के बल्केश्वर घाट पर छठी मइया की पूजा करती व्रती
- फोटो : अमर उजाला
भीगे वस्त्र में और हाथों में फल पकवानों से लदी टोकरी के साथ व्रतियों ने सूर्य देव की आराधना की। अंत में सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने पुत्र की प्राप्ति, पति की दीर्घायु, रोगों से मुक्ति और परिवार में सुख शांति की कामना की। वहीं यमुना के घाटों के अलावा कुछ श्रद्धालुओं ने घरों में और मोहल्ले में जलाशय बनाकर छठी मैया की पूजा की।
प्रसाद के रूप में व्रती महिलाओं ने ठेकुआ, फलों में केला, नारियल, पपीता, सेब, अनार, सिंघाड़ा, संतरा, नीबू, सब्जियों में अदरक, कद्दू, मूली आदि के साथ पान, सुपारी, मेवा, गाय के दूध से अर्घ्यदान दिया। अखंड पूर्वांचल सेवा समिति के अध्यक्ष विजय गौतम ने बताया कि छठ पर्व में सेवा का भी बहुत महत्व है। समिति के पदाधिकारियों ने कैलाश घाट और हाथीघाट पर सफाई की और व्यवस्था संभाली।