दुनिया में दुर्लभ हुए जलीय जीवों को चंबल में नया जीवन मिला है। नदी के साफ पानी में 1876 घड़ियाल, 706 मगरमच्छ, 74 डॉल्फिन, 7000 कछुओं का बसेरा है। साथ ही संकटग्रस्त इंडियन स्कीमर की आबादी भी चंबल में बढ़ने लगी हैं। यहां इनकी संख्या 466 हैं।
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मगरमच्छ
- फोटो : अमर उजाला
देश विदेश की विभिन्न नदियां प्रदूषण की मार झेल रही हैं। जिससे जलीय जीव भी संकट में है। पर, 1979 में चंबल में दुनिया में दुर्लभ हुए घड़ियाल, मगरमच्छ का संरक्षण हुआ। जिसके सुखद नतीजे दिख रहे हैं।
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चंबल और बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
कछुओं की 7 दुर्लभ प्रजातियां साल, धोढ, धमोका, पचेडा, कटहवा, सुंदरी, इंडियन स्टार का कुनबा भी चंबल में बढ़ा है। डॉल्फिन के संरक्षण के लिए भी 2009 में चंबल को चुना गया। यहां इनकी संख्या 74 हो गई है।
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दुर्लभ चिड़िया
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया में दुर्लभ हुई चिड़िया इंडियन स्कीमर के लिए भी चंबल की वादियां मुफीद साबित हुई हैं। ब्लैक विंग्ड स्टिल्ट, बार हैडेड गूज जैसी चिड़ियों को भी चंबल की वादियां रास आने लगी हैं।
चंबल सेंक्चुरी की खूबसूरत तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया में दुर्लभ जीवों को चंबल नदी में नया जीवन मिला है। घड़ियाल से लेकर इंडियन स्कीमर तक का कुनबा बढ़ा है। संरक्षण के प्रयास फलीभूत हो रहे हैं। नदी का साफ पानी और स्वच्छ पर्यावरण जलीय जीव और चिड़ियों को रास आ रहा है। - आरके सिंह राठौड, रेंजर चंबल रेंज बाह।