आगरा जिले में चंबल नदी का जलस्तर घटने लगा है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे तक नदी का जलस्तर घटकर 134.30 मीटर पर आ गया। हालांकि बाह तहसील के गांवों में बाढ़ के हालात अभी बने हुए हैं। यहां कई गांव जलमग्न हैं, जिनका तहसील मुख्यालय से संपर्क टूटा हुआ है। इन गांवों के ग्रामीणों ने अपने बच्चों और पालतू पशुओं के साथ बीहड़ के ऊंचे टीलों पर रात गुजारी है। प्रशासन ने ग्रामीणों तक राशन व अन्य खाद्य सामग्री पहुंचाने का दावा किया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि उन तक प्रशासन की मदद नहीं पहुंची है।
बता दें कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई बारिश के बाद चंबल नदी का जलस्तर 135.90 मीटर पर पहुंच गया था। खतरे के निशान से छह मीटर ऊपर पहुंचने चंबल नदी के तटवर्ती 38 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। स्कूल, पंचायत घर, झोपड़ियां व खेत-खलिहान जलमग्न हैं। अभी नुकसान का आकलन शुरू नहीं हो सका है।
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टीले पर तम्बू में रहने को मजबूर ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
एक तरफ प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत बचाव कार्यों का दावा कर रहा है दूसरी तरफ उमरैठा पुरा निवासी राधे लाल और सुभाष ने बताया कि प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली है। तिरपाल डालकर टीले पर स्वयं रहने की व्यवस्था की है।
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टीले पर ग्रामीणों ने बनाए तम्बू
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क्योरीपुरा गांव निवासी रामरतन, सतेंद्र, राम प्रकाश और कालीचरन ने बताया कि बाढ़ में उनके पशु लापता हो गए हैं। जिनमें तीन भैंस व दो बकरियां शामिल हैं। बुधवार को लापता हुए पशुओं का कोई सुराग नहीं मिला। गोहरा, झरना पुरा, पुरा शिवालाल, पुरा डाल, उमरैठा पुरा, कछियारा, रेहा, डगोरा, भगवान पुरा आदि गांव में बाढ़ का पानी भर गया है।
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बाढ़ प्रभावित गांव में विधायक और डीएम, एसएसपी
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डीएम बोले- राशन और दवाएं बंटवा रहे हैं
डीएम प्रभु एन सिंह का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन सामग्री, दवाइयां वितरित कराई जा रही हैं। आपदा प्रबंधन दल मदद में जुटे हैं। चंबल का जलस्तर घटने लगा है। अगले 24 घंटे में जलस्तर बढ़ने के आसार नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है।
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बाढ़ में डूबा मकान
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वर्ष 2019 में बने थे ऐसे हालात
17 सितंबर, 2019 को चंबल में ऐसे ही हालात बन गए थे। तब जलस्तर 136.10 मीटर तक पहुंच गया था। 40 से अधिक गांवों में पानी भर गया था। चंबल नदी में अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ वर्ष 1996 में आई थी। तब चंबल का जलस्तर 136.60 मीटर तक पहुंच गया था।
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गांव में बाढ़ का पानी
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पीएसी ने बचाई दो ग्रामीणों की जान
चंबल के उफान से मलहन टूला और बावन टूला गांव में छह फीट तक पानी भर गया है। यहां मूलचंद और नवल सिंह पानी में फंस गए। पीएसी बचाव दल ने स्टीमर की मदद से दोनों ग्रामीणों की जान बचाई। उन्हें पानी से निकाल कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
किसान ने पेड़ पर चढ़कर बचाई जान
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किसान ने पेड़ पर चढ़कर बचाई जान
उमरैठा पुरा के किसान कमल सिंह पुत्र सर्वेश बाढ़ के पानी में फंस गए थे। उन्होंने पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। मुश्किल हालातों में बाहर निकाले गए किसान ने जान बचने पर राहत की सांस ली।