वृंदावन के श्री रंगजी मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव के चौथे दिन रविवार को शेषनाथ के रथ पर विराजमान होकर भगवान रंगनाथ की सवारी निकली। रजत निर्मित रथ पर विराजमान प्रभु श्री गोदारंगमन्नार की अलौकिक आभा का दर्शन भक्तजनों को सेवा भाव का संदेश दे रहा था। ब्रह्मोत्सव में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
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श्री गोदारंगमन्नार
- फोटो : Amar Ujala
मान्यता है कि इस सवारी के दर्शन करने से बैकुंठ लोक की प्राप्ति तथा पितरों को सद्गति प्राप्त होती है। वहीं, सांयकाल बेला में भगवान रंगनाथ की श्री कल्प वृक्ष पर सवारी निकाली। श्रुति का उद्घोष है आनंदी भवामि जिस प्रकार कल्प वृक्ष देवताओं की मनोकामना पूर्ति कर उनको आनंदित करता है।
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ठाकुर श्री गोदारंगमन्नार की रथयात्रा
- फोटो : अमर उजाला
उसी प्रकार भक्त श्री प्रभु को अपनी विविध सेवाओं से आनंदित कर स्वयं भी आनंद में डूब जाता है। कल्पवृक्ष की सवारी का यह दर्शन भक्तों को सर्वानंद प्रदान कर नव ऊर्जा का संचार करने वाला था। काष्ठ निर्मित प्राचीन परंपरागत कल्पवृक्ष की यह दिव्य सवारी श्री रंग मंदिर से आरंभ होकर बगीचा तक गई।
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ब्रह्मोत्सव
- फोटो : Amar Ujala
रंगनाथ मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में स्वर्ण रजत निर्मित वाहनों पर विराजमान भगवान के दर्शन तो प्रमुख आकर्षण है ही इसके अलावा उनका तिरु मंजन यानि अभिषेक भी अपने आप में सबसे खास है। भगवान जब सवारी से वापस आते हैं तो उनका अभिषेक किया जाता है।
भगवान और गोदाजी को रोजाना दोपहर को नौ नदियों के जल का आह्वान कर विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियों चंदन, दूध, दही, शहद, नारियल पानी इत्यादि से दिव्य स्नान कराया जाता है। ताकि दिन भर जो वो घूम कर आते हैं उसकी थकान मिटाई जा सके और शाम को फिर से उन्हें तैयार किया जा सके।