यूं तो मथुरा-वृंदावन धार्मिक नगरी है। यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष आराध्य की एक झलक पाने के लिए आते हैं, लेकिन मथुरा शहर की बात कुछ हटके है। यहां के अधिसंख्य लोगों की दिनचर्या राजाधिराज द्वारिकाधीश के दर्शन और उनकी मंगला आरती के साथ होती है। दर्शन-पूजन के बाद यमुना मइया का दीदार करना भी ये लोग नहीं भूलते हैं। इसके बाद अपने-अपने दैनिक कार्यों में लग जाते हैं। यह क्रम वर्षों से चला आ रहा है।
शहर के हृदयस्थल तिलकद्वार (होली गेट) से उत्तर दिशा में लगभग आधे से पौन किलोमीटर दूर यमुना नदी के पास द्वारिकाधीश मंदिर है। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय का यह मंदिर न सिर्फ मथुरा या ब्रजवासियों की आस्था का केंद्र है, बल्कि देश-विदेश और खासकर गुजरातियों के लिए विशेष महत्व रखता है। सर्द मौसम में प्रात: साढ़े छह बजे मंदिर के कपाट खुलते ही मंगला आरती होती है। मंगला आरती के बाद सुबह सात बजे तक ठाकुर जी के दर्शन होते हैं।
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द्वारिकाधीश मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
इस मंगला आरती का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि सुबह-सुबह शहरवासी अपने दिन की शुरुआत राजाधिराज के दर्शन से करते हैं। ऐसे हजारों श्रद्धालु हैं, जो वर्षों से नियमित मंगला आरती के दर्शन कर रहे हैं। चाहे वह व्यापारी हों, नौकरीपेशा हों, विद्यार्थी हों या फिर महिलाएं। सुबह नहा-धोकर पहुंच जाते हैं मंदिर की चौखट पर और शीश झुकाकर, माथा टेककर हाथ जोड़कर खड़े हो जाते हैं अपने आराध्य की एक झलक पाने के लिए।
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मंदिर में रुक्मणी माता की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
जैसे ही मंगला आरती शुरू होती है सभी अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर जयघोष करने लगते हैं। अपने ठाकुरजी को रिझाने के लिए कोई भावुक हो कर आंसू बहाता है तो कोई ध्यानमग्न होकर उनकी आराधना में लीन हो जाता है। दर्शन-पूजन के बाद सभी अपने-अपने कार्यों में जुट जाते हैं। कोई अपना प्रतिष्ठित खोलता है तो कोई अपनी ड्यूटी पर जाने की तैयारी में लग जाता है।
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जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
दर्शन के बाद जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता
द्वारिकाधीश मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद जलेबी-कचौड़ी का नाश्ता करना भी नहीं भूलते हैं। होली गेट से द्वारिकाधीश मंदिर तक और यमुना मइया के किनारे वाले रास्ते पर अनगिनत बेढ़ई-कचौड़ी और जलेबी आदि की दुकानें हैं, जहां सुबह-सुबह नाश्ता करने वालों की भीड़ लगी रहती है। दो-दो कचौड़ी या बेढ़ई और सौ ग्राम जलेबी खाना शायद ही कोई भूल पाए।
ज्यादातर श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के बाद यमुना मइया का आशीर्वाद लेना भी नहीं भूलते हैं। अपने घरों से चुगा-दाना लाकर जलचरों को आओ...आओ कहकर बुलाते हैं और उन्हें दोनों हाथों से चुगाते हैं। गाय और बंदरों के लिए भी तमाम श्रद्धालु अपने घरों से खाने का इंतजाम करके लाते हैं।