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'कांजी बड़े वाले बाबा' के बाद दिव्यांग बुद्धिलाल की मदद को बढ़े हाथ, भावुक कर देगी इनकी कहानी

Tue, 13 Oct 2020 10:27 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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सांसद ने बुद्धिलाल को दी नई ट्राईसाइकिल - फोटो : अमर उजाला
आगरा में 'कांजी बड़े वाले बाबा' के बाद शास्त्रीपुरम निवासी 52 वर्षीय दिव्यांग बुद्धिलाल की मदद के लिए लोगों ने हाथ आगे बढ़ाए हैं। धार्मिक पुस्तकें बेचने वाले बुद्धिलाल का वीडियो वायरल होने के बाद सोमवार को जिलाधिकारी प्रभु एन. सिंह और सांसद एसपी सिंह बघेल उनकी मदद के लिए पहुंचे। जिलाधिकारी ने पुस्तकें खरीदीं, जबकि सांसद ने बुद्धिलाल को नई ट्राई साइकिल दी। अगली स्लाइड्स में पढ़िए बुद्धिलाल की भावुक कर देने वाली कहानी....

 
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पुस्तक विक्रेता बुद्धिलाल - फोटो : अमर उजाला
दिव्यांग बुद्धिलाल संजय प्लेस स्थित स्पीड कलर लैब के पास धार्मिक पुस्तकों की स्टॉल लगाते हैं। वह अपनी टूटी ट्राई साइकिल से आते हैं। रविवार शाम 6.46 बजे पुलिसकर्मी सचिन कौशिक ने टि्वटर पर 2.03 मिनट का उनका वीडियो वायरल किया। इसमें लोगों से पुस्तकें खरीद कर उनकी मदद करने के लिए अपील की गई। इस वीडियो को 20 हजार बार देखा गया। 
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डीएम ने खरीदीं बुद्धिलाल की किताबें - फोटो : अमर उजाला
सोमवार दोपहर 12 बजे पहले जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह बुद्धिलाल की मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने स्टॉल से भागवत गीता समेत कई पुस्तकें खरीदीं। जिलाधिकारी ने पूछा तो बुद्धिलाल ने बताया कि पति-पत्नी दोनों को 500 रुपये प्रति माह दिव्यांग पेंशन मिल रही है।

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सांसद एसपी सिंह बघेल ने दी नई ट्राई साइकिल - फोटो : अमर उजाला
जिलाधिकारी के बाद दोपहर 12.30 बजे सांसद एसपी सिंह बघेल भी बुद्धिलाल की स्टॉल पर पहुंचे। उसकी मदद के लिए नई ट्राइसाइकिल भेंट की। उनके साथ पहुंचे 20 से अधिक कार्यकर्ताओं ने पुस्तकें भी खरीदीं। 
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बुद्दिलाल की दुकान पर सांसद एसपी सिंह बघेल - फोटो : अमर उजाला
बुद्धिलाल ने बताया कि जब वह 30 साल के थे, तब बुखार आया। उसके बाद फालिश मार गई। दोनों हाथ-पैर खराब हो गए। सही से बोल भी नहीं पाते। वीडियो में बुद्धिलाल अपनी टूटी आवाज में पुस्तकें की बिक्री न होने की बात कर रहे हैं। इस दौरान वह भावुक हो जाते हैं। उनकी पत्नी भी दोनों पैरों से विकलांग हैं। एक 12 साल का बेटा है। पुस्तकें बेचकर ही परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। 
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पुस्तक विक्रेता बुद्धिलाल - फोटो : अमर उजाला
बुद्धिलाल ने बताया कि पहले 150 से 200 रुपये कमा लेते थे। लेकिन कोरोना के बाद अब दिनभर में 50 रुपये भी नहीं आते। एक भी पुस्तक नहीं बिक रही। टूटी ट्राई साइकिल 12 किमी चलाने से हाथ में छाले पड़ गए। उनके पास इतने पैसे भी नहीं कि ट्राई साइकिल की मरम्मत करा सकें। कई महीने बाद मेरी सारी पुस्तकें बिक गई। लोगों ने बहुत मदद की है।
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बुद्धिलाल से बात करते डीएम प्रभु एन सिंह - फोटो : अमर उजाला
सोशल मीडिया पर मदद के लिए हाथ बढ़ाने वालों ने पेटीएम से बुद्धिलाल के खाते में पैसा भेजने की बात कही। इस पर जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि पेटीएम से पैसा भेजना गलत है। किसी को अगर उनकी मदद करनी हैं तो वह स्टॉल पर जाकर पुस्तकें खरीदें। बुद्धिलाल ने कहा कि मैं भीख नहीं मांगता। पुस्तक बेचकर पैसा कमाता हूं।
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