फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एटा का मंदिर: जहां होती है ऐसी देवी की प्रतिमा की पूजा, जिनका सिर है धड़ से अलग, नवरात्र में दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

Thu, 07 Apr 2022 03:03 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

सदर तहसील क्षेत्र के गांव गिरौरा में सिरकटी माता की प्रतिमा लोगों में आस्था का केंद्र है।
विज्ञापन
1 of 5
मुरकटिया मइया मंदिर - फोटो : अमर उजाला
एटा जिले के गांव गिरौरा में सिर कटी माता की प्रतिमा का पूजन किया जाता है। नवरात्र में आसपास के जिलों से ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से भी भक्त माता के दर्शन के लिए आते हैं। खंडित प्रतिमा का पूजन निषेध माना जाता है। लेकिन सदर तहसील क्षेत्र के गांव गिरौरा में सिरकटी माता की प्रतिमा लोगों में आस्था का केंद्र है। खासतौर से नवरात्र में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मंदिर का नाम ही मुरकटिया माता मंदिर रख दिया गया है। 
विज्ञापन

2 of 5
महंत सुखदेवानंद महाराज - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के महंत सुखदेवानंद महाराज बताते हैं कि बहुत पहले कासगंज के एक राजा हाथी पर सवार होकर घूमने आए हुए थे। इसी दौरान हाथी झाड़ियों के बीच निकले चकरोड पर यहीं बैठ गया। महावत ने उसे उठाने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं उठा। जिसके बाद राजा रात में यहीं रुके थे। 

विज्ञापन

3 of 5
मुरकटिया मइया मंदिर - फोटो : अमर उजाला
देवी मां ने राजा को सपना देकर मंदिर बनाने का आदेश दिया। जिस पर राजा ने अगले ही दिन इस स्थान पर खोदाई शुरू कराई। खोदाई के दौरान देवी मां की प्रतिमा निकली, लेकिन उसका सिर कट गया। 

4 of 5
मुरकटिया मइया मंदिर - फोटो : अमर उजाला
प्रतिमा को यहीं स्थापित किया गया और सिर एक ओर रख दिया गया। यह भी कहा जाता है कि पास के गांव दतेई के शरारती तत्व मंदिर से मां का सिर उठाकर ले जाते थे, जो अगले दिन स्वयं मंदिर में ही मिलता था। महंत बताते हैं कि मुरकटिया मइया के दरबार में यूपी से ही नहीं अन्य प्रदेशों से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मुरकटिया मइया मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मंदिर एटा जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर एटा-कासगंज मार्ग पर है। रोडवेज बस स्टैंड से ऑटो, प्राइवेट बस आदि के जरिए मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें