वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में चैत्र शुक्ल एकादशी यानि 15 अप्रैल से फूल बंगलों के आयोजनों की शुरुआत हो जाएगी, जो श्रावण मास की हरियाली अमावस्या तक जारी रहेगी। इस दौरान 100 दिन से अधिक तक मंदिर परिसर देशी-विदेशी फूलों से महकेगा। मंदिर में रोजाना नए डिजाइन के फूल बंगले सजाए जाएंगे। फूलों पर विराजमान होकर ठाकुरजी भक्तों को दर्शन देंगे।
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बांके बिहारी मंदिर में सजाया गया फूल बंगला (फाइल)
बांकेबिहारी मंदिर में फूल बंगला सजाने की परंपरा पौराणिक है। मान्यता है कि ठाकुरजी को गर्मी से राहत देने के लिए फूल बंगला सेवा की जाती है। इसी मान्यता के चलते विभिन्न राज्यों से आए भक्त 15 अप्रैल से बांके बिहारी के लिए फूल बंगले सजवाएंगे। देशी-विदेशी फूलों के बीच विराजमान ठाकुरजी अपने भक्तों को दर्शन देंगे।
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बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
हर दिन अलग-अलग डिजाइन में बनने वाले बंगले के लिए दोपहर को मंदिर के पट बंद होने के बाद कारीगर अपने कार्य में जुट जाते हैं। मंदिर में यह बंगला मात्र चार घंटे में ही तैयार कर दिया जाता है। हालांकि सुबह से फूलों की साफ-सफाई के साथ ही विदेशी फूलों से मत्था, तोरण आदि तैयार कर लिए जाते हैं।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
अधिकांश फूल दिल्ली, बंगलूरू, हैदराबाद, कोलकाता आदि से मंगाए जाते हैं। इनमें मोगरा, गेंदा, मोतिया, गुलाब, रायबेल, रजनीगंधा, जूही, चंपा, केतकी, कमल आदि के फूल प्रमुख है। इन्हीं से मंदिर को आकर्षक रूप प्रदान किया जाता है।
दुनियाभर में विख्यात बांके बिहारी मन्दिर में फूल बंगला बनाने की परम्परा ने अपनी अलग पहचान बना ली है। ये फूल बंगले कला, संस्कृति, भक्ति और पर्यावरण के समन्वय के अद्भुत नमूने हैं। श्रद्धालु अपनी इच्छानुसार विदेशों से भी इसके लिए फूल मंगवाते हैं। इन फूलों से तैयार होने वाले बंगले में एक बार का खर्चा करीब 5 लाख से 15 लाख रुपये तक आ जाता है। भक्त खुद इसका वहन करते हैं।