दोपहर के एक बजे का समय। सिकंदरा थाना से बमुश्किल 500 मीटर कीठम की तरफ। दीवार के बीच में बना हुआ रास्ता। बाहर ऑटो खड़े कर इसमें होकर जाते चालक। अंदर बिकतीं गांजे की पुड़ियां। पुलिस के आने का कोई डर ही नहीं। लाइन लगी है, बेचने वाला युवक थैले में 300-400 पुड़िया लिए है। जो 50 रुपये दे रहा है, उसे एक पुड़िया दे रहा है। पुलिस की नाक के नीचे हो रही गांजे की इस बिक्री को अमर उजाला टीम ने कैमरे में रिकॉर्ड किया...
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गांजा बेचता युवक
- फोटो : अमर उजाला
सिकंदरा स्मारक से मरियम टूम की साइड में चलने पर बाइक से मुश्किल से दो मिनट की दूरी पर यह जगह है। बाहर दीवार है। अंदर सुनसान जगह है। इसी में तख्त लगाकर सजी है गांजे की दुकान। ऑटो वालों को इसकी जानकारी है। इसे चलाने वाला युवक बाहर स्कूटी पर खड़ा रहता है। अंदर एक युवक गांजा बेच रहा है। वह मूल रूप से इटावा का रहने वाला है। सिकंदरा में ही किराए पर रहता है। बाहर स्कूटी पर खड़ा युवक गांजा लाने का, पुलिस को मैनेज करने का काम संभालता है।
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पीली शर्ट में गांजा बेचता युवक
- फोटो : अमर उजाला
गांजा बेचने वाले युवक ने बताया कि वह सिर्फ गांजा बेचता है। अफीम का काम जगदीशपुरा में होता है। भांग के ठेकों पर भी मिल सकती है। उसने बताया कि सिकंदरा स्मारक के सामने आरओबी के नीचे पहले अफीम और गांजा मिल जाता था, अब कुछ दिन से वहां काम बंद है।
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गांजा दिखाता युवक
- फोटो : अमर उजाला
गांजा, चरस और अफीम की बड़ी मंडी बन चुका है शहर। रेलवे पुलिस ने ही दो महीने में 350 किलो गांजा पकड़ा है। न्यू आगरा, शमसाबाद, हरीर्पवत, सिकंदरा थाना में भी चरस और अफीम पकड़ी जा चुकी है। दस दिन पहले ही खुलासा हुआ था कि सटोरिया सुभाष कालिया भी अब मादक पदार्थो की तस्करी कर रहा है।
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प्लास्टिक की थैली से गांजा निकालता युवक
- फोटो : अमर उजाला
छह महीने में एक बार भी नहीं आई पुलिस
रिपोर्टर : यह गांजा कहां से लाते हो, नकली तो नहीं है? गांजा विक्रेता : अरे भाई, एकदम प्योर है, चेक करके देख लो, चिलम भरो, और दम लगाओ, फिर बताना। रिपोर्टर : अच्छा, अच्छा यकीन हो गया, हमें तो दवाई के लिए चाहिए, इसलिए पूछ रहे थे। गांजा विक्रेता : नहीं, भइया, ये दवाई के काम नहीं आता, हकीम ने अफीम बताई होगी, यहां सिर्फ गांजा है। रिपोर्टर : भइया, ये बताओ, यहां पुलिस तो नहीं आती? कहीं मैं पुड़िया लूं और पकड़ा जाऊं? गांजा विक्रेता : क्या बात कर रहे हो, पुलिस क्यों आएगी, बगैर पुलिस के ये काम चल जाएगा क्या ? रिपोर्टर : समझा नहीं भइया, पुलिस के बगैर का क्या मतलब है? गांजा विक्रेता : अरे भाई, पुलिस से मिलकर चलना पड़ता है, वरना धंधा नहीं कर सकते। रिपोर्टर : अच्छा, तो क्या पुलिस को हर पुड़िया पर पैसा देना पड़ता है ? गांजा विक्रेता : आप डरिए नहीं, कोई नहीं पकड़ेगा, पुलिस को महीना जाता है।
सिकंदरा थाना पुलिस को निर्देश दिए हैं टीम भेजकर पड़ताल कराई जाए। वहां गांजा बिक्री होती मिले तो तुरंत कार्रवाई की जाए। आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए - बोत्रे, रोहन प्रमोद, एसपी सिटी