फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शहर में सरकार! ताजनगरी में विकास कार्यों को कब मिलेगी रफ्तार...

Mon, 25 Nov 2019 10:36 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
1 of 7
आगरा - फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगभग दो महीने बाद आगरा आ रहे हैं। वह एबीवीपी के कार्यक्रम में भाग लेंगे। हालांकि संभावना है कि एमजी रोड के एक थाने और एसएन मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण भी करेंगे। साथ ही अफसरों के साथ विकास कार्यों पर बात होगी। शहर के आगे बढ़ने के लिए बेहद जरूरी परियोजनाओं का हाल भी उनके सामने होगा। इन पर काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। पेश है रिपोर्ट...
 
विज्ञापन

2 of 7
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
सिविल एन्क्लेव के लिए जमीन अधिग्रहण भी अधूरा
500 करोड़ के प्रोजेक्ट सिविल एन्क्लेव के निर्माण नहीं हो पा रहा है। पर्यटन नगरी के लिए इसकी बेहद जरूरत है। अभी सिर्फ दो फ्लाइट हैं दिल्ली-आगरा और आगरा-जयपुर। सिविल एन्क्लेव के लिए 2016 में जमीन अधिग्रहण शुरू हुआ। अब तक पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी नहीं मिल पाई है। हालांकि  अब सुप्रीम कोर्ट ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
 
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
8000 करोड़ की योजना है। मेट्रो यार्ड के लिए जमीन तक नहीं दिला पा रहे हैं अफसर। न ही ट्रैक के लिए जमीन मिली है। आठ हजार करोड़ की योजना है। टीटीजेड की एनओसी नहीं मिली है। बजट का भी बंदोबस्त नहीं हुआ है। यह हाल तब है जबकि सरकार का दावा है कि 2021 तक प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाएगा।

4 of 7
यमुना - फोटो : अमर उजाला
बैराज : डीपीआर से आगे नहीं बढ़ी बात: 500 करोड़ की योजना है। यमुना पर बैराज के लिए डीपीआर बनी। जगह तय हुई नगला पैमा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौका मुआयना किया लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया है। 500 करोड़ की योजना है। शहर के पेयजल संकट को देखते हुए बैराज की बहुत आवश्यकता है। यमुना पार की पेयजल समस्या हल हो सकती है।
विज्ञापन

5 of 7
गंगाजल - फोटो : अमर उजाला
गंगाजल : 33 फीसदी शहर में पहुंचा ही नहीं: आठ सौ करोड़ रुपये खर्च हो जाने के बाद भी एक तिहाई शहर को अब तक गंगाजल नहीं मिल पाया है। सिकंदरा वाटर वर्क्स तक इसकी सप्लाई पहुंची है लेकिन यहां कई मोहल्लों में घरों तक कनेक्शन नहीं। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स तक तो गंगाजल पहुंच ही नहीं पाया है।
विज्ञापन

6 of 7
स्मार्ट सिटी के कार्यालय में कंट्रोल रूम में काम करते लोग - फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट सिटी : सभी चौराहों पर कैमरे तक नहीं लग पाए: दो हजार करोड़ का प्रोजेक्ट है। शहर में अब तक कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। फतेहाबाद रोड पर काम रुका हुआ है। एक नाला तक नहीं बन पाया है। चिन्हित किए गए सभी चौराहों पर कैमरे भी नहीं लग पाए हैं। न ही शहर में पैनिक बटन लगे हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
आउटर रिंग रोड और इनर रिंग रोड - फोटो : अमर उजाला
इनर रिंग रोड : दूसरे चरण का काम शुरु ही नहीं: इनर रिंग रोड का प्रथण चरण तो पूरा हो गया लेकिन यह रिंग अधूरा है। भारी वाहनों को शहर के बाहर से ही निकालने के लिए द्वितीय चरण का काम होना है जो शुरू नहीं हो पा रहा है। किसानों की कुछ समस्याएं हैं जिनका प्रशासन समाधान नहीं कर पा रहा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें