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तस्वीरें: 'मां तुझे प्रणाम' में कविता-शायरी का संगम, नामचीन शायर व कवियों ने पढ़े कलाम

Sun, 12 Aug 2018 11:27 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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kavi sammelan in agra - फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला के अभिनव अभियान ‘मां तुझे प्रणाम’ में शनिवार रात को सूरसदन प्रेक्षागृह कवि सम्मेलन और मुशायरे के संगम का गवाह बना। देश के नामचीन शायरों और कवियों ने रचनाएं पेश कीं। कभी वीर रस और ओज की कविताएं श्रोताओं की भुजाएं फड़काती रहीं तो कभी ठहाके गूंजने लगते। शृंगार की कविताओं ने युवाओं के जैसे मन की बात की।
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kavi sammelan in agra - फोटो : अमर उजाला
सूरसदन में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और मुशायरे का उद्घाटन हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, प्रख्यात होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ आरएस पारीक, इंडियन ऑयल के सीनियर मैनेजर मनमोहन खेड़ा, केसी सेठ, एलआईसी के मनोज धवन, जीडी अग्रवाल और कथूरिया फिल्म्स के अमित कथूरिया ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया। 
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kavi sammelan in agra - फोटो : अमर उजाला
डीआईजी लव कुमार कवि सम्मेलन के मुख्य अतिथि रहे, जिन्होंने दर्शकों के साथ देर रात तक रचनाओं को सुना। कवि सम्मेलन में सभी कवियों को सम्मानित करने के बाद सरस्वती वंदना आगरा के प्रख्यात कवि शिव सागर ने की। इसके बाद कभी वीर रस और ओज की रचनाएं तो कभी हास्य रस में श्रोता डूबे रहे। 

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पद्मश्री से सम्मानित प्रख्यात कवि सुरेंद्र शर्मा, आशीष अनल, दीपक गुप्ता, अशोक चारण, देवदत्त देव (मुंबई) ने अपनी कविताओं से अपने विशिष्ट अंदाज में मुहब्बत की नगरी को नमन किया। शायरों में मुनव्वर राणा, मंजर भोपाली, सबा बलरामपुरी ने अपनी शायरी से लोगों को दीवाना कर दिया। कार्यक्रम के संयोजक हास्य कवि रमेश मुस्कान रहे। 
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मुंबई से आए देवदत्त देव ने गुनगुनाया ‘अरमान दिल के सारे, हमने मिटा दिए हैं, सारे गिले शिकवे कब के भुला दिए हैं’। फरीदाबाद से आए दीपक गुप्ता ने बयां किया कि ‘अगर मैं झूठ बोलूं तो मेरा किरदार मरता है, जो बोलूं सच तो फिर भूखा मेरा परिवार मरता है’। 
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लखनऊ से आईं शायरा सबा बलरामपुरी ने युवाओं के दिल को कुछ यूं टटोला ‘हम पर तुम्हारे प्यार ने एहसान कर दिया, निर्धन सी जिंदगी को भी धनवान कर दिया, पूछा सहेलियों ने दिल में बसा है कौन, हमने तुम्हारे नाम का एलान कर दिया’। शायर मंजर भोपाली ने शायरी की महफिल को आगे बढ़ाते हुए सुनाया कि ‘प्यार गर नहीं होता फूल भी नहीं खिलते, जिंदगी के दामन में गुल भरे नहीं होते’। 
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कवि नीरज कांत राही ने अपनी रचना सफेदपोश से लोगों को खबरदार किया कि ‘आज सपेरे ही बस्ती में सांप छोड़ने आए हैं’। संचालन कर रहे वीर रस के कवि अशोक चारण ने सुनाया कि ये जहरीला घूंट कसम से हंसकर के पी जाऊंगा, मेरी लाश को मिले तिरंगा मर कर भी जी जाऊंगा। 

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कवि सम्मेलन में सम्मानित किए गए प्रख्यात कवि शिवसागर ने अपनी रचना पेश की ‘आलिंगन को व्याकुल हैं चारों मीनारें ताज की, दो बाहें शाहजहां की हैं, दो अंखियां हैं मुमताज की’। 1969 से काव्य लेखन और 1972 से काव्य पाठ कर रहे प्रख्यात कवि शिव सागर को कवि सम्मेलन में सम्मानित किया गया। वहीं लखीमपुर खीरी से आए ओज के कवि आशीष अनल ने वीरता के पर्याय के रूप में बच्चे के हिंदुस्तान लिखने की कविता पेश की। 

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प्रख्यात शायर मुनव्वर राणा ने कलाम पेश किया ‘कागज के बने ताजमहल बेच रहे हैं जो बाग के मालिक थे, वह फल बेच रहे हैं ए खाक ए वतन देख तो ले आंख उठाकर, रोटी के लिए मीर ग़ज़ल बेच रहे हैं’। 

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हास्य कवि पदमश्री सुरेंद्र शर्मा ने अपनी चुटीली रचनाओं को सुनाया तो श्रोता ठहाके लगाते रहे। उन्होंने अपनी सुपरिचित पत्नी पर आधारित चुटीली रचनाएं सुनाईं। उनका अनूठा अंदाज और शैली शब्दों से ज्यादा हंसाती रही। 
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kavi sammelan in agra - फोटो : अमर उजाला
मां तुझे प्रणाम के मुख्य प्रायोजक  सेंटर फार एंबिशन, ड्रिवेन बाय हीरो मोटर्स, पावर्ड बाय इंडियन आयल, सपोर्टेड बाय कैच साल्ट एंड स्पाइसेज, महिंद्रा राइज, डा. एमपीएस ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशन, भारतीय जीवन बीमा निगम, एफमेक, कथूरिया फिल्म्स एंड प्रोडक्शन हैं। 
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