जिस पत्नी की हत्या के आरोप में पति सोनू डेढ़ साल और उसका दोस्त गोपाल नौ माह जेल में रहा, वह महिला आरती दौसा (राजस्थान) के विशाला गांव में मिली। वहीं आरती ने जो कहानी बताई वो फिल्मी स्टोरी से कम नहीं है। पुलिस को जानकारी देते हुए आरती ने बताया कि दूसरे पति के छोटे भाई ने उसे पांच लाख रुपये में बेच दिया था। कुचामन सिटी से भाग कर वापस विशाला गांव अपने दूसरे पति भगवान के पास पहुंची।
आरती ने बताया कि सबसे पहले मेरी और सोनू की शादी बांदीकुई कोर्ट में हुई थी। इसके बाद वह पति सोनू और नंदोई के साथ बाइक से गोवर्धन घूमने गए। दो दिन बाद तीनों वापस बालाजी पहुंचे। तब सास ने पति से कहा कि आरती को घर लेकर मत आना। उसे वहीं छोड़ दें। इसके बाद पति सोनू ने उसे बालाजी से हिंडौन की बस में बैठा दिया। आरती ने बताया कि उसके पास पैसे नहीं थे। इस वजह से बस वाले ने उसे बीच रास्ते महुवा में ही उतार दिया। महुवा में उतरने के बाद भी वह पति सोनू के इंतजार में दो दिन तक भटकती रही, लेकिन वो नहीं आया।
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मथुरा का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
आरती ने बताया कि इसके बाद वह किसी तरह बालाजी पहुंची, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला। फिर उसने एक मिठाई के कारखाने में काम करना शुरू कर दिया। वहां मजदूरी करने आने वाले विशाला गांव के भगवान नाम के युवक से मुलाकात हुई और उसने कोर्ट में शादी कर ली। भगवान के साथ शादी किए उसे करीब छह साल हो गए। अभी छह महीने पहले भगवान के भाई को पता लगा कि उसका पहला पति सोनू और उसका दोस्त गोपाल तलाश कर रहे हैं।
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वृंदावन कोतवाली
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भगवान के छोटे भाई ने उसे नागौर जिले के कुचामन सिटी में रहने वाले एक व्यक्ति से पांच लाख रुपये में बेच दिया। कुचामन सिटी का रहने वाला वह व्यक्ति उसे अपने साथ ले गया। अभी 20 दिन पहले ही किसी तरह कुचामन सिटी से भाग कर वापस विशाला गांव दूसरे पति भगवान के पास पहुंची। आरती ने बताया कि दूसरा पति ट्रक ड्राइवर है। वह कई महीने तक घर से बाहर रहता है। इस वजह से उसे पहले यह जानकारी नहीं हो पाई थी कि उसे बेचा गया है।
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आरती
- फोटो : अमर उजाला
आरती ने बताया कि उसे परिवार की याद आई और मां उर्मिला देवी और पिता सूरज प्रसाद गुप्ता से मिलने के लिए उरई गई, लेकिन उनका कुछ भी नहीं पता चला। अब उसे दूसरे पति भगवान के साथ ही रहना है। किसी को अब सजा दिलवाना नहीं चाहती है। सोनू उसे राजस्थान में छोड़कर चला गया था। मायके वाले समझे कि मैं कहीं नहीं मिल रही, इसका मतलब सोनू ने हत्या की है। इसी में उसे सजा हुई। सभी निर्दोष हैं जो कुछ भी हुआ, वह सब अनजाने में हुआ है।
वहीं पहले पति सोनू ने बताया कि 'मैंने आरती को महुवा से जयपुर की बस में बैठाया, इसके बाद टिकट लेने गया। मैंने दो टिकट ली, जब तक लौटकर आया बस वहां से चल दी। इसके बाद मैंने आरती को बालाजी तक तलाश किया लेकिन वो नहीं मिली। आरती द्वारा उसे छोड़कर जाने की बात गलत है। अगर मुझे आरती को छोड़ना होता तो शादी क्यों करता।'
आरती के सामने आते ही पिता सूरज गुप्ता ने आखिरकार उसे पहचान लिया। बेटी को जिंदा देख माता-पिता की आंखों में आंसू छलक आए। फिलहाल, पुलिस इस उलझी गुत्थी को सुलझाने की कोशिश कर रही है। साथ ही आरती के पिता सूरज प्रसाद गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई करने का मन भी बना रही है। वहीं आरती को मंगलवार को वृंदावन कोतवाली में कागजों में दर्ज कर लिया गया। बुधवार को आरती को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। इधर, आरती के माता-पिता का कहना है कि फोटो देखकर वह आरती को नहीं पहचान सके। देर रात जब आरती और उसकी मां उर्मिला और पिता सूरज को सामने लाया गया तो पहचान लिया। बेटी से मिलकर मां और बाप के आंसू निकल आए।