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दिल्ली से भी ज्यादा खतरनाक है आगरा की हवा, यहां 80 फीसदी मौतों का कारण वायु प्रदूषण

Sun, 03 Nov 2019 05:31 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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वातावरण में छाई धुंध - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली और मुंबई से ज्यादा घातक वायु प्रदूषण ताजमहल के शहर में हैं। ब्लैक कार्बन और पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की जितनी मौजूदगी है, उससे आशंका है कि 80 फीसदी मौतें वायु प्रदूषण से हुईं। 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मृत्यु की मुख्य वजह सीओपीडी, फेंफड़ों के कैंसर और स्ट्रोक बन रही है।
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दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट - फोटो : अमर उजाला
प्रदूषण स्तर में बढ़ोतरी पर यह डरावनी हकीकत आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के अध्ययन में सामने आई है। इसमें आगरा के वायु प्रदूषण में मौजूद पीएम 2.5 कण और ब्लैक कार्बन की मौजूदगी से सेहत पर असर की पड़ताल की गई है।
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वातावरण में छाई धुंध - फोटो : अमर उजाला
इंस्टीट्यूट की प्रतिमा गुप्ता, अशोक जांगिड़ और रंजीत कुमार ने वायु प्रदूषण में पीएम 10, 2.5 एवं ब्लैक कार्बन की मौजूदगी और उसके सेहत पर असर पर शोध पत्र पेश किया है। इसके एक हिस्से में पीएम कणों के कारण होने वाली मृत्यु के जो आंकड़े दिए गए हैं, वो बेहद डरावनी हकीकत से सामना कराने वाले हैं। 

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ताजमहल पर छाई धुंध - फोटो : अमर उजाला
यह अध्ययन आगरा के करीब 8000 लोगों पर किया गया। इसमें आशंका जताई गई है कि पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों के कारण सबसे ज्यादा मौतें हो सकती हैं। गर्मियों, मानसून, मानसून के बाद और सर्दी में जिस स्तर पर वायु प्रदूषण पहुंच रहा है, उसमें प्राकृतिक मृत्यु की संख्या 1372 है, जबकि 6,818 की मौत वायु प्रदूषण के कारण सीओपीडी, फेंफडों के कैंसर और स्ट्रोक से होने की आशंका है।
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दिल्ली में छाई धुंध - फोटो : एएनआई

दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के मुकाबले आगरा में प्रदूषण से सेहत पर खतरा ज्यादा है। ब्लैक कार्बन की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है, जो खून में पहुंचने पर दिल का दौरा, फेंफड़ों के कैंसर, सीओपीडी के केस बढ़ा रहा है। -प्रो. रंजीत कुमार, दयालबाग एजूकेशनल इंस्टीट्यूट, आगरा

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मास्क लगाए विदेशी पर्यटक - फोटो : अमर उजाला

स्मॉग के कारण दिल का दौरा, फेंफड़ों के कैंसर, अस्थमा, श्वसन रोग से मृत्यु का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। बेहद भयावह हालात हैं, लेकिन इनसे निपटने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इनके सोर्स जानने के बाद नियंत्रण के ईमानदार प्रयास की जरूरत है। -डॉ. जीबी सिंह, एस एन मेडिकल कॉलेज, आगरा

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