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संकट के सिपाही: प्लाज्मा और रक्तदान कर दूसरों की जान बचा रहे आगरा के ये युवा

Mon, 10 May 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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रक्तदान करते युवा - फोटो : अमर उजाला
आगरा में कोरोना संक्रमण की आशंका के कारण लोग अपनों की मदद के लिए भी आगे नहीं आ पा रहे हैं। इस संकट की घड़ी में युवाओं का एक वर्ग रक्तदान और प्लाज्मा दान करके लोगों की जान बचा रहा है। व्हाट्स एप और फेसबुक पर पेज बनाए हुए हैं। आपस में संपर्क में रहते हैं। रक्त या प्लाज्मा की जरूरत का पता चलने पर इंसानियत के इन दोस्तों में से कोई पहुंच जाता है। पढ़िए संकट के सिपाहियों के जज्बे की कहानी...
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रक्तदान करने वाले आकाश गौतम - फोटो : अमर उजाला
6 साल से रक्तदान कर रहे आकाश
नरीपुरा निवासी आकाश गौतम प्राइवेट कंपनी में जॉब करते हैं। उन्होंने बताया कि छह साल पहले उन्होंने रक्तदान करने की शुरुआत की थी। अब तक सैकड़ों यूनिट रक्तदान कर चुके हैं। संक्रमण बढ़ने के बाद भी वह रक्तदान कर रहे हैं। 30 अप्रैल को उन्होंने रक्तदान किया। उनके पास एक कॉल आई थी। एक गर्भवती को रक्त की आवश्यकता थी। उनके रक्तदान से गर्भवती की जान बच गई। उन्होंने व्हाट्स एप पर ग्रुप बना रखा है। फेसबुक पर एक पेज भी है। दोस्तों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करते रहते हैं। 
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रक्तदान करते मनीष - फोटो : अमर उजाला
खुशी मिलती है
नरीपुरा के ही रहने वाले मनीष रक्तदान के लिए अक्सर आगे आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि वह एक बुटिक में नौकरी करते हैं। आकाश गौतम के ग्रुप से जुड़े हुए हैं। एक सप्ताह पहले आकाश का कॉल आया। उन्होंने बताया कि एक महिला को रक्त की जरूरत है। वह रक्तदान करने चले गए। उनका कहना है कि संक्रमण की आशंका रहती है लेकिन हम लोग मदद करके इंसानियत का फर्ज निभा रहे हैं। अब तक वह पांच बार रक्तदान कर चुके हैं। बोले, रक्तदान से खुशी मिलती है, आगे भी सेवा करते रहेंगे।

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रक्तदान करते कृष्णा - फोटो : अमर उजाला
छोटे से प्रयास से जान बच जाती है
ताजगंज के महुआखेड़ा निवासी कृष्णा प्राइवेट जॉब करते हैं। दो साल पहले उन्होंने रक्तदान की शुरुआत की थी। एक व्यक्ति को रक्त की जरूरत थी। इस पर वह रक्त देने पहुंच गए थे। अब कोरोना कॉल में वह एक ग्रुप से जुड़े हुए हैं। इस ग्रुप के सदस्य लोगों की मदद के लिए आगे आते हैं। कुछ दिन पहले एक व्यक्ति को रक्त की जरूरत थी। ग्रुप में संदेश आने के बाद कृष्णा पहुंच गए थे। उनका कहना है कि एक छोटे से प्रयास से किसी की जान बच सकती है तो लोगों को आगे आना चाहिए। 
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तीन बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं कुलदीप - फोटो : अमर उजाला
21 बार रक्त, तीन बार प्लाज्मा दिया
नरीपुरा निवासी कुलदीप कुमार देहली गेट स्थित एक अस्पताल में मेडिकल स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि वह अक्सर अस्पताल में मरीजों के परिजनों को रक्त के लिए भटकते हुए देखते हैं। इसलिए ही उन्होंने रक्तदान करने का फैसला किया। वह कोरोना काल में भी रक्त दे रहे हैं, जिससे मरीजों की सहायता हो सके। अब तक 21 बार रक्त और तीन बार प्लाज्मा डोनेट कर चुके हैं। उन्हें यह सेवा करते हुए छह साल हो चुके हैं। हाल ही में एक ब्रेन हेमरेज के मरीज को प्लाज्मा की आवश्यकता थी। इस पर वो प्लाज्मा डोनेट करने चले गए। आगे भी वह इसी तरह करते रहेंगे। 
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