बीते साल की आठ सितंबर की एयर क्वालिटी से तुलना करें तो इस साल तीन गुना ज्यादा प्रदूषण रहा। अनलॉक में वाहनों की संख्या भी सड़कों पर ज्यादा हो गई। वाहनों में ईंधन जलने के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा सामान्य से 41 गुना ज्यादा हो गई।
चार दिन से तेज धूप और सभी दिन बाजार खुलने के कारण सड़कों पर भारी भीड़ का असर पर्यावरण पर पड़ रहा है। मंगलवार को आगरा प्रदेश का तीसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा। मंगलवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में आगरा का एयर क्वालिटी इंडेक्स 101 पर पहुंच गया जो सामान्य से दो गुना ज्यादा है।
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आगरा
- फोटो : अमर उजाला
मानसून में सबसे हैरत की बात यह है कि कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा औसत से 41 गुना ज्यादा है जो आमतौर पर सर्दियों के महीनों में ही रहती थी। बीते साल की आठ सितंबर की एयर क्वालिटी से तुलना करें तो इस साल तीन गुना ज्यादा प्रदूषण रहा।
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बाजार
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अनलॉक में वाहनों की संख्या भी सड़कों पर ज्यादा हो गई। वाहनों में ईंधन जलने के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा सामान्य से 41 गुना ज्यादा हो गई। रात 10 बजे और सुबह 8 बजे के बाद दोपहर में 2 बजे मोनोऑक्साइड सबसे ज्यादा रहा। हवा में घातक मोनोऑक्साइड की मात्रा दिन भर 33 से 41 गुना तक बनी रही।
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हरीपर्वत चौराहे पर लगा जाम
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जानलेवा है मोनोऑक्साइड गैस
पर्यावरण विशेषज्ञ उमेश शर्मा के मुताबिक कार्बन मोनोऑक्साइड जहरीली गैस है। डीजल इंजन की गाड़ियों में ईंधन जलने में इस गैस की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। किसी भी तरह के ईधन के जलने से यह गैस निकलती है। मनुष्य के खून में परिसंचरण के लिए आवश्यक तत्व ऑक्सीहीमोग्लोबिन के साथ मिलकर यह गैस कार्गो ऑक्सी हीमोग्लोबिन तत्व का निर्माण करती है। यह तत्व खून में ऑक्सीजन को मिलने से रोकता है। जिसके कारण सांस लेने की सामान्य प्रक्रिया रुकती है। सांस के साथ ज्यादा मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड अंदर जाने से चक्कर आने के साथ कमजोरी महसूस होने लगती है।