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संजलि हत्याकांड: छात्रा को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया गया था, चार साल में सिर्फ 18 लोगों की गवाही, 90 की बाकी

Sun, 18 Dec 2022 05:52 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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संजिल हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
आगरा के थाना मलपुरा क्षेत्र के गांव लालऊ में चार साल पहले दसवीं की छात्रा संजलि को पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया गया था। उसकी मौत हो गई थी। इस घटना ने देश को हिला दिया था। राजनीति गर्मा गई थी। पुलिस ने घटना का खुलासा किया। दो आरोपियों को जेल भेजा। पिता का कहना है कि चार साल में 108 में से 18 की गवाही हुई है। वह आज भी न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें कानून व्यवस्था पर पूरा विश्वास है। आरोपियों को सजा मिलेगी, तब ही बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। 

गांव लालऊ निवासी हरेंद्र की बेटी संजलि को 18 दिसंबर 2018 को स्कूल से लौटते समय पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया गया था। उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह दसवीं की छात्रा थी। संजलि के पिता हरेंद्र ने बताया कि घटना को चार साल हो गए हैं। वह आज तक न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में 108 गवाह बनाए थे। इनमें पुलिस अधिकारी से लेकर कर्मचारी शामिल थे। अब तक वादी, विवेचक सहित 18 की गवाही हो सकी है।
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छात्रा संजलि - फोटो : अमर उजाला
इस घटना का खुलासा पुलिस ने 24 दिसंबर 2018 को किया था। कलवारी निवासी विजय और लखनपुर निवासी आकाश को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुख्य आरोपी संजलि का तहेरा भाई योगेश था। उसने खुदकुशी कर ली थी। उसने संजलि से बदला लेने के लिए घटना को अंजाम दिया था। 
 
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छात्रा संजलि का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
संजलि को गांव के पास पेट्रोल डालकर जला दिया था। पुलिस ने 23 मार्च 2019 को विजय और आकाश के खिलाफ चार्जशीट लगाई थी। 16 अप्रैल 2019 को कोर्ट में आरोप तय हो गए। आरोपी अकाश और विजय जमानत पर बाहर हैं। अगली गवाही 19 दिसंबर को होनी है।

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संजिल हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अहम साक्ष्य जुटाए थे। इनमें पुलिस ने घटना में प्रयुक्त दो बाइक, दो हेलमेट, योगेश का मोबाइल, काला बैग और लाइटर बरामद किया था। इसके साथ ही योगेश के मोबाइल की व्हाट्स एप चैट, पत्र, संजलि को दी गई साइकिल की रसीद, फोटो सहित अन्य साक्ष्य लिए गए थे।
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संजलि के पिता - फोटो : अमर उजाला
पिता ने कहा कि बेटी की बरसी आज है। वह आरोपियों को सजा दिलाने के लिए प्रयासरत हैं। मगर, कोरोना काल में काम छिनने की वजह से आर्थिक तंगी का शिकार हो गए। अब कोर्ट जा पाना भी मुश्किल हो रहा है। इस कारण काफी समय से केस के संबंध में जानकारी भी नहीं ले पा रहे हैं। आरोपियों को सजा मिलेगी, तब ही बेटी की आत्मा को शांति मिलेगी। 
 
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