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शोध छात्रा हत्याकांड: इस वारदात से दहल गया था आगरा का दिल, आठ साल से इंसाफ का इंतजार

Sun, 14 Mar 2021 11:32 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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शोध छात्रा हत्याकांड का आरोपी उदय - फोटो : अमर उजाला
आगरा के दयालबाग के एक शिक्षण संस्थान की लैब में 15 मार्च 2013 को शोध छात्रा की पेपर कटर से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। हत्याकांड को आठ साल बीतने के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय का इंतजार है। केस में अब भी तारीख पड़ रही हैं। गवाही भी पूरी नहीं हो सकी है। आरोप है कि घटना को शिक्षण संस्थान के ही छात्र उदयस्वरूप ने अंजाम दिया था। वह जेल में बंद है। कोर्ट में मामला विचाराधीन है। सोमवार को भी केस में तारीख लगी है।
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शोध छात्रा हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
मूलरूप से दिल्ली निवासी छात्रा शिक्षण संस्थान से बीटेक कर रही थी। वह शोध भी कर रही थी। उसे संस्थान की लैब में पेपर कटर से मारा गया था। पुलिस ने छात्रा की कार संस्थान के बाहर से बरामद की थी। शव लैब में पड़ा मिला था। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना में संस्थान के प्रमुख अधिकारी के रिश्तेदार उदयस्वरूप और लैब सहायक यशवीर संधू को जेल भेजा था। केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया था। चार्जशीट दाखिल करने के बाद केस कोर्ट में विचाराधीन है। 
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अदालत (सांकेतिक तस्वीर)
'मेरी बेटी के केस में भी जल्द हो फैसला'
शोध छात्रा के पिता और वादी का कहना है कि बेटी की हत्या को आठ साल बीत चुके हैं। हर दिन बेटी को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करता हूं। केस कोर्ट में विचाराधीन है। हर महीने तारीख पर आना पड़ता है। अभी गवाही पूरी नहीं हो सकी है। कोर्ट से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। हाल ही में दुष्कर्म और हत्या के कई केस में एक-एक साल के अंदर सजा हुई है। अब वह यही चाहते हैं कि उनकी बेटी की हत्या के केस में भी जल्द आरोपी को सजा मिल जाए। सबसे अहम साक्ष्य डीएनए परीक्षण रिपोर्ट का था। दुष्कर्म की आशंका के चलते बनाई गई स्लाइड से डीएनए सैंपल लिया गया था। इसका मिलान उदरूस्वरूप के डीएनए से कराया गया था।

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शोध छात्रा हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
आरोपी की गिरफ्तारी को सड़कों पर उतरे थे लोग 
हत्या के बाद आरोपी की गिरफ्तारी के लिए आंदोलन हुआ था। सड़कों पर विद्यार्थी उतर आए थे। उन्हें किसी तरह संभाला गया था। इसके बाद विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भी प्रदर्शन किया था। पुलिस पर आरोपी को पकड़ने का काफी दबाव था। पुलिस ने संस्थान के अंदर ही कई दिन तक विवेचना की थी। इसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी थी। 
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शोध छात्रा हत्याकांड - फोटो : अमर उजाला
कब क्या हुआ 
- 15 मार्च 2013 : दयालबाग स्थित शिक्षण संस्थान में शोध छात्रा की हत्या। 
- 17 मार्च : पुलिस ने लैब के पास से लैपटॉप बरामद किया। 
- 18 मार्च : संस्थान के परिसर में ही छात्रा का मोबाइल बरामद किया गया। 
- 22 अप्रैल : पुलिस ने हत्याकांड के मामले में उदयस्वरूप और यशवीर संधू को जेल भेजा। 
- 16 जुलाई : पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोप पत्र सीओ कार्यालय भेजा। 
- 18 जुलाई : आरोपपत्र कोर्ट में पेश किया। इसमें उदयस्वरूप और यशवीर संधू को आरोपी बनाया। हत्या (302) और दुष्कर्म के प्रयास (376/511) की धारा लगाई। 
- 22 जुलाई : प्रदेश सरकार की संस्तुति पर केस सीबीआई को ट्रांसफर किया गया। 
- 10 फरवरी 2014 : उदयस्वरूप और यशवीर संधू को हाईकोर्ट से जमानत मिली। 
- पांच जनवरी 2016 : सीबीआई ने विवेचना के बाद आरोपपत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया। सीबीआई ने पुलिस की ओर से लगाई दुष्कर्म के प्रयास की धारा को हटाया। आरोप पत्र दुष्कर्म (376) , हत्या (302) और साक्ष्य मिटाने (201) में लगाया गया। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में यशवीर संधू को क्लीन चिट दी। उदयस्वरूप पर आरोप तय किए। 
- दो मई 2018 : प्रदेश सरकार ने केस में प्रभावी पैरवी के लिए पूर्व डीजीसी अशोक कुमार गुप्ता को स्वतंत्र लोक अभियोजक नियुक्त किया।
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शोध छात्रा हत्याकांड के आरोपी - फोटो : अमर उजाला
आरोपी उदयस्वरूप को दोबारा भेजा गया था जेल  
वादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता एसएस चौहान ने बताया कि उदयस्वरूप और यशवीर संधू को जेल भेजने के दस महीने बाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। मगर, 22 मई 2016 वादी पक्ष की ओर से स्वतंत्र लोक अभियोजक अशोक कुमार गुप्ता के साथ उन्होंने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया। इसमें कहा कि हाईकोर्ट से उदयस्वरूप को जमानत मिली थी। मगर, सीबीआई ने हत्या, दुष्कर्म और साक्ष्य मिटाने में आरोप पत्र पेश किया है। इसलिए उदयस्वरूप को जेल भेजा जाए। 

कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए उदयस्वरूप को फिर से 12 मई 2016 को जेल भेजा। उसको तब से जमानत नहीं मिल सकी है। अधिवक्ता एसएस चौहान ने बताया कि कोर्ट में मृतका के पिता, मां, बहन सहित 38 की गवाही पूरी हो चुकी है, जबकि केस में 65 गवाह बनाए गए हैं। अभी 27 की गवाही शेष है। गवाहों में पुलिस अधिकारी, कर्मचारी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक सहित अन्य लोग हैं। केस में अब 15 मार्च की तारीख लगी है। 
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