सचिन की हत्या के बाद गम में डूबा परिवार
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कोरोना महामारी का उठाया फायदा
आरोपियों ने हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने के लिए कोरोना महामारी का फायदा उठाया। लाश को बैग में रखकर पीपीई किट पहनकर बल्केश्वर शमशान घाट गए और वहां कोविड से मौत और मृतक का नाम रवि वर्मा बताकर शव का अंतिम संस्कार करवा दिया था। पीपीई किट के कारण लोग उन्हें पहचान नहीं पाए और कोरोना का नाम सुनकर कोई शव के पास तक नहीं आया। पुलिस ने बताया कि दयालबाग निवासी हर्ष चौहान, सचिन और उसके पिता सुरेश चौहान के साथ पार्टनरशिप में ठेकेदारी करता था। इधर, कोरोना में उसका काफी घाटा हुआ था। सचिन के ठेकेदार दोस्त सुमित असवानी का सचिन के ऊपर 40 लाख रुपया बकाया था और काफी समय से मांगने पर भी उसे वापस नहीं मिल पा रहा था। हर्ष ने सुमित को साजिश में शामिल किया और वादा किया कि अपहरण के बाद वो मध्यस्थता करवाकर दो करोड़ की फिरौती दिलवा देगा। इसमें से एक करोड़ उसका होगा और एक करोड़ उसे दे देगा। किसी कारण से अगर फिरौती नहीं मिली तो भी वह सुमित को उसका सचिन पर बकाया 40 लाख रुपया दे देगा। इसके बाद सुमित ने अपने साथियों रिंकू, मनोज और हैप्पी के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। सचिन का परिवार पूरे प्रकरण के बाद सदमे में है।