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34 साल बाद 35 को सजा: 'घरों से निकल रही थीं बच्चों के चीखने की आवाजें...' इन धाराओं में 35 दोषियों को मिली सजा

Sat, 31 May 2025 02:19 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के बहुचर्चित पनवारी कांड के 35 दोषियों को शुक्रवार को खचाखच भरी एससी-एसटी कोर्ट में 34 साल बाद सजा सुनाई गई। न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय ने 90 पेज के अपने फैसले में 35 दोषियों को पांच-पांच साल का कारावास और 41-41 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
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पनवारी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा के पनवारी कांड में भड़की हिंसा के बाद अकोला में बवाल के मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने 30 साल में 31 गवाहों के बयान कराए। उन्होंने अपनी गवाही में बताया कि करीब एक घंटे तक बवाल हुआ था। घरों से बच्चों के चीखने की आवाजें सुनाई दे रही थीं।

अकोला की भागो देवी ने अपने बयान में कहा कि 24 जून 1990 की बात है। वह अपने घर पर बच्चों के साथ बैठी थीं। दोपहर करीब 1 बजे बस्ती में लोगों के चीखने की आवाजें आने लगीं। उन्होंने घर से बाहर निकलकर देखा तो करीब 200 लोग हाथों में लाठी, डंडे और धारदार हथियार लेकर उनकी घर की तरफ आ रहे थे। 
 
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पनवारी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह डर से घर के अंदर चली गईं। मगर आरोपी अंदर आ गए सबके साथ मारपीट कर घर से नकदी और सोना-चांदी के जेवरात लूट ले गए। उन्होंने आरोपियों की पहचान भी की। गवाह एदल सिंह ने कहा कि घटना के समय वह पत्नी के साथ घर पर थे। आरोपियों ने एक राय होकर घर पर हमला बोल दिया। मारपीट और लूटपाट की। जाते समय में घर को आग के हवाले घर दिया। उनके सपनों का आशियाना उनके आंखों के सामने जलकर राख हो गया।
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दोषी करार देने पर निकल आए आंसू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गवाह द्वारिका प्रसाद ने कहा कि घटना से एक महीने पहने ही वह सेना से सेवानिवृत होकर घर आए थे। रास्ते में जाते समय जाट समाज के लोगों ने पकड़ लिया। मारपीट कर बेहोशी का हालत में छोड़कर चले गए। जानकारी पर पहुंचे उनके छोटे भाई उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए थे। जहां 21 दिन इलाज चलने के बाद डॉक्टरों ने डिस्चार्ज किया था।

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दोषी करार देने पर ले जाती पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गवाह मांगेलाल ने कहा कि घटना के समय वह अपनी मां और पिता के साथ घर पर थे। बस्ती के चारों तरफ से लोगों के चीखने की आवाजें आ रही थीं। गोली चलने की आवाज सुनकर घर से बाहर निकले थे। जाट समाज के लोगों ने पकड़ लिया। उनके साथ उनके माता-पिता की पिटाई की थी। पूरी बस्ती वालों को जाति सूचक शब्द बोले थे। 
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गांव में चर्चा करते रहे लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन धाराओं में 35 दोषियों को मिली सजा
पनवारी कांड के बाद अकोला में भड़की हिंसा में अदालत ने 35 आरोपियों को दोषी पाते हुए आईपीसी की 6 धाराओं में पांच-पांच साल कारावास और 41-41 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दोषियों की इस मामले में पूर्व में जेल में बिताई अवधि को भी सजा में समाहित किया जाएगा। जुर्माने की आधी रकम हिंसा में हुए घायलों को दी जाएगी।

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केस में 34 साल बाद कोर्ट का फैसला। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आईपीसी की धारा - 3(1)(10)..में पांच-पांच साल कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना
- 452..पांच-पांच साल कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना
- 148..दो-दो साल कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माना
- 323..छह-छह महीने कारावास और एक-एक हजार रुपये जुर्माना
- 427..दो-दो साल कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना
- 504..दो-दो साल कारावास और 5-5 रुपये जुर्माना
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केस को लेकर चर्चा करते रहे लोग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पनवारी कांड : 34 साल बाद मिला इंसाफ... 35 दोषियों को सजा
आगरा के बहुचर्चित पनवारी कांड के 35 दोषियों को शुक्रवार को खचाखच भरी एससी-एसटी कोर्ट में 34 साल बाद सजा सुनाई गई। न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय ने 90 पेज के अपने फैसले में 35 दोषियों को पांच-पांच साल का कारावास और 41-41 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।

 

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दो दोष सिद्ध अभियुक्त पेश नहीं हुए, जबकि तीसरे गैरहाजिर मुल्जिम गोपाल ने फैसला सुनाए जाने के बाद दीवानी में समर्पण किया। इसके पहले 29 मई को इन आरोपियों को दोषी करार दिया गया था। इस दौरान दीवानी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।

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गांव में सन्नाटा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदरा के गांव पनवारी में 22 जून 1990 को अनुसूचित जाति के परिवार की बेटी की बरात चढ़ाने के विवाद में हिंसा भड़क गई थी। चोखेलाल जाटव की बेटी मुंद्रा की बरात आनी थी। 21 जून को जाट समाज के लोगों ने बरात चढ़ाने का विरोध किया। इस कारण बरात नहीं चढ़ सकी। दूसरे दिन पुलिस की मौजूदगी में बरात चढ़ाने पर हिंसा भड़क गई थी।

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पसरा सन्नाटा।
आसपास के इलाके में फैल गई थी हिंसा
फायरिंग में सोनीराम जाट की मौत हुई। इसके बाद आसपास के इलाके में हिंसा फैल गई थी। 24 जून 1990 को पनवारी की आग अकोला तक पहुंच गई। यहां अनुसूचित व जाट समाज के लोगों के बीच संघर्ष हुआ। इसमें एक महिला की मौत हुई, जबकि 150 से अधिक लोग घायल हुए। हिंसा के मामले में कागारौल के तत्कालीन एसओ ओमप्रकाश राणा ने 200 से अधिक लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

 

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agra police - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विवेचना के बाद वर्ष 1994 में 72 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किया गया। इस मामले में स्पेशल जज एससी-एसटी कोर्ट पुष्कर उपाध्याय ने 29 मई को 35 आरोपियों को दोष सिद्ध करार दिया था। इनमें से 32 अभियुक्त ही अदालत में हाजिर हुए, शेष तीन अभियुक्त अदालत में नहीं पहुंचे।
 

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पनवारी कांड पीड़ित - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लंबे संघर्ष के बाद अकोला के हिंसा पीड़ितों को न्याय मिला
इसी मामले में शुक्रवार को सजा सुनाई गई। इस दौरान दोनों पक्षों के ही सैकड़ों लोग सुबह 8 बजे से ही दीवानी पहुंच गए। सुरक्षा के मद्देनजर एएसएफ के जवान अदालत के बाहर तैनात रहे। अभियोजन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शमशेर सिंह ने फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद अकोला के हिंसा पीड़ितों को न्याय मिल सका है।

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पनवारी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इनको सुनाई गई सजा
जयदेव, राजेंद्र, पप्पू, तेजवीर, बन्नो, जीतू, कुंवरपाल, कल्लो, श्यामवीर, लीलाधर, भूपेंद्र, सत्तो, महेश, नाहर सिंह, रामवीर, सुरेंद्र सिंह, रामजीत, निरंजन, हरभान, पूरन सिंह, देवी सिंह, उम्मेदी, विज्जो, रामजीत पुत्र छिद्दी, महेंद्र सिंह, संतो उर्फ संतराम, सुजान, सुदान उर्फ सौदान, महताब, दंगल सिंह, रज्जो उर्फ राजू, संपत सिंह और तीन अन्य को सजा सुनाई गई। इनमें से गोपाल ने फैसले के बाद दीवानी में समर्पण कर दिया। वहीं नंगा पुत्र तेजपाल व राजकुमार पुत्र विपिन की तलाश में गैर जमानती वारंट जारी किए जाएंगे।
 
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पनवारी कांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन्हें किया गया बरी
इसी मामले में अदालत ने सब्बो, कुशलपाल, रामपाल, राजो, वीरी सिंह, भूरा उर्फ निरोत्तम, रुगधो, रणवीर सिंह, सूखी, बलवीर, जालिम सिंह, देवो, सीताराम, बनै सिंह, करतो उर्फ करतू को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया।
 
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