सिकंदरा-ताज पूर्वी गेट कॉरिडोर की मेट्रो डिपो आकार लेने से पहले ही सात हेक्टेयर सिमट गई है। 16 हेक्टेयर में प्रस्तावित डिपो अब 9 हेक्टेयर में बनेगी। पीएसी से 7.9 हेक्टेयर जमीन ही मिल सकी है। मंडलायुक्त कार्यालय की करीब सवा हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव फिलहाल राजस्व परिषद में लंबित है। पहली मेट्रो डिपो अब छोटी हो गई है। वर्ष 2019 में जब राइट्स ने डीपीआर बनाई थी तब डिपो के लिए 16 हेक्टेयर भूमि का प्रस्ताव था। प्रशासन भूमि का इंतजाम नहीं कर सका। फिर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने 13 हेक्टेयर जमीन पर सहमति जताई। लेकिन इसका भी इंतजाम नहीं हो सका।
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फतेहाबाद मार्ग पर हो रहा मेट्रो प्रोजेक्ट का कार्य
- फोटो : अमर उजाला
15वीं बटालियन पीएसी में सिर्फ 7.9 हेक्टेयर जमीन मिली। 1.2 हेक्टेयर जमीन मंडलायुक्त कार्यालय से ली जानी है। इस तरह से करीब नौ हेक्टेयर जमीन ही डिपो के लिए मिल रही है। इसमें से भी मंडलायुक्त कार्यालय की जमीन अभी तक यूपीएमआरसी को नहीं मिली है। फिलहाल करीब आठ हेक्टेयर में 112 करोड़ रुपये से लीसा इंजीनियर्स ने डिपो का निर्माण शुरू किया है।
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फतेहाबाद मार्ग पर हो रहा मेट्रो प्रोजेक्ट का कार्य
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दूसरी जमीन से पीएसी भी नहीं संतुष्ट
पीएसी की करीब आठ हेक्टेयर जमीन पर डिपो बन रही है। पीएसी को इस जमीन के बदले रहनकला में प्रशासन ने जमीन दी है, लेकिन पीएसी अधिकारी इस जमीन से संतुष्ट नहीं हैं। इसके लिए पीएसी के एडीजी ने पिछले दिनों मेट्रो अधिकारियों के साथ बैठक कर कोई बीच का रास्ता निकालने की बात कही है।
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Agra Metro: मेट्रो का कार्य करतीं मशीनें
- फोटो : अमर उजाला
इससे छोटा नहीं हो सकता साइज
हमें जितनी जमीन चाहिए थी उतनी नहीं मिली। डिपो का साइज छोटा कर नौ हेक्टेयर में करना पड़ा है। अब इससे छोटा साइज नहीं हो सकता। मंडलायुक्त कार्यालय की जमीन मिलने का इंतजार है। -अरविंद राय, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, आगरा मेट्रो
Agra Metro: मेट्रो का कार्य करतीं मशीनें
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जितनी जमीन थी हम दे चुके
जितनी जमीन थी हम दे चुके। मेट्रो अधिकारी भी सहमत हो चुके हैं। मंडलायुक्त कार्यालय की जमीन की प्रक्रिया चल रही है। रहनकला में पीएसी के लिए भी जमीन दी गई है। -प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी