उत्तर प्रदेश के आगरा में तेज रफ्तार कार ने इस कदर कहर बरपाया कि पांच लोगों की माैत हो गई। किसी मां ने बेटा खो दिया तो किसी बहन ने भाई। जब मृतकों के शव घर पहुंचे तो कोहराम मच गया।
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परिवार में मचा कोहराम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आगरा के नगला बूढ़ी गांव में शुक्रवार रात सड़क हादसे में पांच लोगों की माैत के बाद गम की ऐसी चादर फैली कि हर घर से केवल सिसकियां गूंजती रहीं। किसी घर में चूल्हा नहीं जला। किसी मां की गोद सूनी हो गई, तो किसी भाई का सहारा छिन गया। सुबह होते ही केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई आंखों में आंसू और दिल में दर्द लेकर शवों के आने के इंतजार में था। बस्ती का हर कोना सन्नाटे में डूबा था। शनिवार को दोपहर में शवों के पहुंचते ही चीत्कार मच गई। इस दौरान केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड छावनी में तब्दील रहा। पोइया श्मशान घाट पर पुलिस बल की मौजूदगी में दाह संस्कार किया गया।
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आगरा सड़क हादसा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड पर सुबह से ही लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए थे। नगला बूढ़ी निवासी मृतक कमल, कृष और बंटेश के शव के इंतजार में परिजन घरों से निकलकर केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड पर बैठ गए। दूसरी ओर बबली का शव पोस्टमार्टम के बाद हाथरस के गांव मिढ़ावली अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया। भानु मिश्र के शव को आवास विकास कॉलोनी भेजा गया।
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परिवारों में मचा कोहराम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भैया उठ जा... देखो मां रो रही है
सुबह करीब 11:30 बजे बंटेश का शव घर लाया गया। भाई देवी सिंह, बहन राजकुमारी और मीनू शव को देखकर रोने लगे। बस्ती के लोग उन्हें संभालने में लग गए। पुलिसकर्मियों ने 15 मिनट बाद ही शव को श्मशान भेज दिया। बंटेश की मौत के बाद देवी सिंह अकेला रह गया है। माता-पिता की पहले ही मौत हो चुकी है।
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आगरा हादसा।
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कृष की अर्थी उठी तो सबको संभालना मुश्किल हो गया
दोपहर 12:16 बजे कृष का शव लाया गया। सड़क पर मां गीता, बहन सुमन, सुरभि और शुभी के साथ अन्य परिजन इंतजार कर रहे थे। भाई नरेंद्र शव के साथ आया तो मां गीता और बहनें उससे लिपट गईं। गीता कुछ ही समय में बेसुध हो गई। नरेंद्र और कृष के दोस्त भी बिलखने लगे। पुलिस ने शव को श्मशान घाट भेजने के लिए मुश्किल से परिजन को तैयार किया।
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आगरा हादसा।
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कमल के घर की चीखें सुन हर आंख हुई नम
कमल का शव 12:44 बजे लाया गया। मां बबली, पिता सतीश, बहन ज्योति और शिवानी के साथ रिश्तेदार भी बैठे थे। शव देखते ही सभी बिलख-बिलख कर रोने लगे। मां और बहनें बेसुध होकर गिर पड़ीं। बस्ती की महिलाओं के साथ महिला पुलिसकर्मी ने संभाला। पिता सतीश को समझाकर शवों को ले जाया जा सका।
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आगरा हादसा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एकजुट होने से रोकती रही पुलिस
केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड छावनी में तब्दील रहा। एडीसीपी आदित्य के साथ चार सर्किल के एसीपी और दर्जनभर थानों की पुलिस मौजूद रही। इसके साथ ही दो प्लाटून पीएसी तैनात रही। पुलिस और पीएसी हंगामा रोकने के लिए लोगों को एकजुट होने से रोकती रही। लोगों की भीड़ इकट्ठा होना सुबह से ही शवों के श्मशान पहुंचने तक लगा रहा।
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आगरा हादसा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बल्ली लगाकर बंद की एक लेन
पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से नगला बूढ़ी चौराहे पर बल्ली लगाकर खंदारी की ओर आने वाली केंद्रीय हिंदी संस्थान रोड की लेन को बंद कर दिया। उस पर चौराहे से करीब दो किलोमीटर दूर तक वाहनों का निकलना बंद रखा गया। दोपहर करीब दो बजे यातायात खोला गया।
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आगरा हादसा।
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बहन का रिश्ता तय कर लौटा था कमल
नगला बूढ़ी में रहने वाला कमल सड़क हादसे में जाने गंवाने से महज 30 मिनट पहले ही बहन का रिश्ता तय कर घर लौटा था। कपड़ा खरीदने की बात कह वह घर से निकला लेकिन लौट नहीं सका। वह बहन के साथ खुशियां भी साझा नहीं कर सका। कमल पेंट करने का कार्य करता है। परिवार में दो साल का बेटा शिवांश, पिता सतीश, माता बबली, छोटा भाई पवन और दो बहन ज्योति व शिवानी हैं। सतीश मजदूरी करते हैं। पवन पढ़ाई कर रहा है।सतीश ने बताया कि शुक्रवार को कमल माता-पिता और मौसी रेनू के साथ बेटी ज्योति का रिश्ता तय करने प्रकाश नगर शाहगंज गया था। वहां से शाम 7:30 बजे सभी लोग लौटे थे।
कमल घर से 20 मिनट में लौटने की कहकर नगला बूढ़ी चौराहे पर कपड़े खरीदने गया था। थोड़ी ही देर बाद सड़क हादसे में कमल के घायल होने की खबर आई। जब वो लोग एसएन इमरजेंसी पहुंचे तो वहां कमल की मौत हो चुकी थी। कमल की करीब तीन साल पहले वंदना से शादी हुई थी। एक बेटा शिवांश है। डेढ़ साल पहले वंदना की मौत हो गई थी। अब इस सड़क हादसे ने शिवांश से पिता कमल को भी छीन लिया।