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Banke Bihari: बिखरी हुई हैं श्रीबांकेबिहारी मंदिर की चल-अचल सम्पत्तियां, कॉरिडोर के लिए साबित होंगी उपयोगी

Thu, 06 Oct 2022 03:44 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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बांके बिहारी मंदिर के रास्ते पर भीड़ - फोटो : अमर उजाला
भगवान श्रीराधाकृष्ण की लीला भूमि वृंदावन में विराजमान श्रीबांकेबिहारी के नाम पर अनेक संपत्तियां मौजूद हैं। इसमें राजस्थान और गोवर्धन क्षेत्र के साथ अधिकांश संपत्तियां वृंदावन में हैं। इनमें से अनेक के स्वामित्व से मंदिर प्रबंधन भी अपरिचित है, जो भक्तों द्वारा ठाकुर जी को समर्पित की गई हैं। अब कॉरिडोर की प्रक्रिया में प्रशासनिक नजर ऐसी संपत्तियों पर है, यह मंदिर के आसपास जनोपयोगी साबित हो सकती हैं।

294 करोड़ रुपये और आभूषण 

काशी विश्वनाथ के पैटर्न पर वृंदावन में तैयार होने वाले बिहारीजी कॉरिडोर के लिए ठाकुरजी के नाम पर मौजूद संपत्तियों का बड़ा उपयोग होने जा रहा है। प्रशासनिक रिपोर्ट के मुताबिक बिहारीजी के खजाने में फिलहाल 294 करोड़ रुपये और आभूषण मौजूद हैं। अचल संपत्ति इससे कहीं ज्यादा है। कॉरिडोर के प्रयास में जुटे प्रशासन की नजर बिहारीजी की उन्हीं संपत्तियों पर है, जिसका उपयोग कॉरिडोर या फिर भक्तों के लिए सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हो सकता है। 
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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
इसके लिए प्रशासन उन संपत्तियों के रिकॉर्ड को खंगाल रहा है, जिसका रिकॉर्ड मंदिर प्रबंधन पर नहीं है। यह वे संपत्तियां बताई जा रही हैं जिन्हें भक्तों ने ठाकुर जी को समर्पित किया लेकिन इनका उपयोग निजी तौर किया जा रहा है। ऐसी कई कोठियां मंदिर के आसपास ही मौजूद हैं।
 
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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
श्रीबांकेबिहारी मंदिर वृंदावन के प्रबंधक मुनीष शर्मा ने बताया कि वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी जी के नाम पर मुख्य मंदिर भवन, कच्ची रसोई, गेट नंबर तीन पर हॉल, किशोरपुरा में 450 वर्ग गज का प्लाट, स्नेहीबिहारी मंदिर निकट दो शिव मंदिर, सती माता समाधि, निधिवन, मोहन बाग, हुनमान जी का मंदिर सहित राधाकुंड स्थित कुंजबिहारी जी का रिकॉर्ड मंदिर प्रबंधन पर मौजूद है। 

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बांके बिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर के सेवाधिकारी आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी ने बताया कि हरिदासजी के समय में ही वृंदावन में बस चुके उनके परिजन पूर्वजों की जन्मस्थली संयुक्त भारत के पंजाब सूबे के मुल्तान जिला अंतर्गत उच्चग्राम (पाकिस्तान) से यहां आते रहते थे।
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बांके बिहारी मंदिर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 1877 के आसपास गोस्वामी दुर्गाप्रसाद एवं अन्य दो सेवायतों ने वहीं के भक्तों के सहयोग से एक मंदिर मुल्तान में तथा दूसरा शक्खर (सिंध) में बनवाया। आज तक आठ गोस्वामी श्रीमुल्तान बिहारीजी महाराज की सेवा करते आ रहे हैं।
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