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Agra Hospital Fire: 53 अस्पतालों में नहीं हैं आग से निपटने के इंतजाम, फिर भी बेखबर अधिकारी

Thu, 06 Oct 2022 03:23 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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अस्पताल से निकलती आग की लपटें - फोटो : अमर उजाला
आगरा के आर मधुराज अस्पताल में लगी आग में डायरेक्टर और उनके दो बच्चों की जान चली गई। 10 बेड का ये अस्पताल बेसमेंट में संचालित हो रहा था। इस हादसे के बाद अब कार्रवाई की बात हो रही है, लेकिन इससे पहले क्या स्वास्थ्य विभाग बेखबर था। शहर के गली मोहल्लों में अस्पताल और जूता कारखाने खुले हुए हैं। अस्पतालों में जहां आग बुझाने के इंतजाम नहीं है। वहीं बेसमेंट में भी संचालित हो रहे हैं। आगरा विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। विभागीय अधिकारी नोटिस देकर खानापूर्ति कर रहे हैं।
 
अगस्त में अग्निशमन विभाग ने शहर के कई अस्पतालों का निरीक्षण किया था। 53 हॉस्पिटल मानक पूरे नहीं मिले थे। इस पर सभी को नोटिस जारी किया गया। उनसे कमियों को पूरा करने के बाद जानकारी देने के लिए कहा गया था। मगर, अब तक जवाब नहीं मिल सका है। यह अस्पताल अब भी संचालित हो रहे हैं। 
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अग्निशमन वाहन- फाइल - फोटो : अमर उजाला
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि विभाग लगातार अभियान चलाता है। जांच में मिली कमियों को इंगित करते हुए नोटिस जारी करते हैं। इसकी रिपोर्ट संबंधित विभाग के अधिकारियों को दी जाती है। पिछले दिनों 53 हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया था।
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आर मधुराज अस्पताल - फोटो : अमर उजाला

आवासीय परिसर में व्यवसायिक गतिविधि

अग्निशमन विभाग की जांच में भी सामने आया कि आवासीय परिसर में व्यवसायिक गतिविधि संचालित हो रही थी। बेसमेंट में अस्पताल चल रहा था। हालांकि विभाग का कहना था कि यह निचला भूतल है। इसके बाद ऊपरी भूतल बना है। इसके अलावा अग्निशमन के इंतजाम पूरे नहीं थी। छत पर कोई टैंक नहीं बना था।
 

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अस्पताल के बाहर जमा भीड़ - फोटो : अमर उजाला

खेरिया मोड़ से धनौली के बीच बिना मानक के 12 अस्पताल

जगनेर रोड पर अस्पतालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पैथोलॉजी भी खूब खुली हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन(आईएमए) आगरा के अध्यक्ष डॉ. ओपी यादव का कहना है कि खेरिया मोड़ से धनौली के बीच करीब 12 अस्पताल बिना मानकों के संचालित हो रहे हैं। यहां प्रशिक्षित स्टाफ भी नहीं हैं।  डॉ. ओपी यादव का कहना है कि विभिन्न अस्पतालों में काम कर चुके स्टाफ (कंपाउंडर आदि) अपना अस्पताल खोल रहे हैं। दूसरों शहरों में सेवारत व सरकारी अस्पतालों से सेवानिवृत्त चिकित्सकों की डिग्री लगाकर उनके नाम से पंजीकरण करा लिया जा रहा है। उनको घर बैठे रुपये मिल रहे हैं। मरीज भर्ती होने पर डॉक्टर की एक विजिट करा ली जाती है। भर्ती के अवधि में अप्रशिक्षित स्टाफ ही इलाज करता है। इसका खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।  
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घटना के बाद अस्पताल के बाहर खड़े लोग - फोटो : अमर उजाला

स्वास्थ्य विभाग भी सूची तैयार कर रहा

स्वास्थ्य विभाग एक से अधिक अस्पतालों में जिन चिकित्सकों का पंजीकरण है, उनकी निगरानी की व्यवस्था बना रहा है। ऐसे चिकित्सकों की सूची सीएमओ की ओर से आईएमए को दी जानी है। अस्पतालों में निरीक्षण के दौरान साक्ष्य भी देखे जाएंगे कि पंजीकृत चिकित्सक ने ही इलाज किया है या किसी और ने। अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के संबंध में सीएमओ की ओर से अस्पतालों को लिखा गया है।  
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