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RBI: बढ़ती ईएमआई से लोगों को मिलेगी राहत, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करने जा रहा जल्द यह बदलाव

Sun, 13 Aug 2023 01:04 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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RBI - फोटो : Social Media
कोरोना महामारी और रूस यूक्रेन युद्ध के कारण दुनियाभर में महंगाई की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ी है। इससे भारत भी अछूता नहीं रहा है। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते बीते सालों में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा रेपो रेट की दरों में कई बार बढ़ोतरी की गई। रेपो रेट की दरों में वृद्धि होने से बैंकों और कई फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट्स को होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य तरह के लोन में ब्याज दरों को महंगा करना पड़ा ताकि महंगाई को नियंत्रित किया जा सके। लोन की दरों में की गई बढ़ोतरी के कारण ईएमआई पहले की तुलना में ज्यादा चुकाना पड़ रहा है। इसी कड़ी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक खास तरह की व्यवस्था लागू करने की योजना बना रहा है, जिससे होम लोन और दूसरे तरह के लोन की बढ़ती ब्याज दरों से ग्राहकों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसी सिलसिले में आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से - 
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RBI - फोटो : Istock
रिजर्व बैंक की इस व्यवस्था के अंतर्गत फ्लोटिंग ब्याज दर को आसानी से फिक्स्ड ब्याज दर में बदला जा सकेगा। इसको लेकर जल्द ही नए नियम लागू किए जाएंगे। इसकी जानकारी खुद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर शक्तिकांत दास ने दी है। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था को लेकर नया ढांचा तैयार किया जा रहा है। 
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RBI - फोटो : ANI
आरबीआई गर्वनर शक्तिकांत दास ने बताया कि ग्राहकों की सहमति और बिना जानकारी के फ्लोटिंग रेट अनुचित रूप से बढ़ाने के कई मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। हालांकि, इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद बैंक अनुचित ढंग से इसको नहीं बढ़ा सकेंगे। 

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RBI - फोटो : ANI
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक इस नए ढांचे का पालन सभी विनियमित संस्थाओं को करना होगा। इस नियम के लागू होने के बाद अगर कर्ज की अवधि या मासिक किस्त में किसी तरह का बदलाव करना है। ऐसे में ग्राहकों से इसको लेकर पहले संवाद करना होगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद ब्याज दर को फिर से तय करने में अधिक पारदर्शिता आएगी। 
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RBI - फोटो : ANI
अगर आप इस बारे में जानना चाहते हैं कि फ्लोटिंग और फिक्स्ड ब्याज दर में क्या अंतर होता है? ऐसे में आपको बता दें कि फ्लोटिंग ब्याज की दरें बाजार स्थितियों के आधार पर बदलती रहती हैं। वहीं फिक्स्ड ब्याज दरें कर्ज की पूरी अवधि के लिए एक समान रहती हैं। 
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