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बात काम की: ट्रेन से करते हैं सफर, तो जरूर जान लें मिडिल बर्थ से जुड़े ये नियम

Tue, 24 Sep 2024 02:56 PM IST
शिखर बरनवाल यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ट्रेन का मिडिल बर्थ - फोटो : Amar Ujala
Middle Birth Open Timing: हर दिन ट्रेन में लाखों लोग सफर करते हैं। ट्रेन में सफर के दौरान बैठने के लिए मुख्य रूप से दो तरह की सुविधाएं होती हैं। रिजर्व और नॉन-रिजर्व सीटें। जनरल कोच में आमतौर पर नॉन-रिजर्व सीटें होती हैं, तो वहीं स्लीपर और एसी बोगी में सफर करने के लिए पहले से सीट रिजर्व करानी होती है। ट्रेन टिकट बुक करने के दौरान आपने देखा होगा कि लोअर बर्थ, अपर बर्थ, मिडिल बर्थ, साइड अपर बर्थ और साइड लोअर बर्थ के विकल्प दिए होते हैं। टिकट बुक करते समय लोगों के पास यह विकल्प होता है कि वो कौन सी सीट बुक करना पसंद करेंगे। 
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रेलवे स्टेशन - फोटो : freepik
सामान्य तौर पर लोग मिडिल बर्थ पर यात्रा करने से बचते हैं। इसके पीछे रेलवे का ही एक ऐसा नियम है, जिसकी वजह से लोग मिडिल बर्थ लेने में खास रुचि नहीं दिखाते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर मिडिल बर्थ से जुड़े रेलवे के क्या नियम हैं? साथ ही ये भी जानेंगे कि मिडिल बर्थ को कब खोल सकते हैं और किस समय फोल्ड करना होता है।
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ट्रेन टिकट - फोटो : freepik
मिडिल बर्थ पर सोने और उठने का समय
मिडिल बर्थ पर आप चाह कर भी एक तय समय से पहले और उसके बाद सो या बैठ नहीं सकते हैं। भारतीय रेलवे के नियमों के अनुसार, जिस भी यात्री को मिडिल बर्थ मिलता है, वो रात के 10 बजे ही सीट को खोल सकता है और सुबह 6 बजे तक इस सीट का इस्तेमाल कर सकता है। यानी नियम के अनुसार, सुबह 6 बजे यात्री को सीट फोल्ड करना ही होता है। 

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ट्रेन टिकट - फोटो : Adobe Stock
बता दें कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक को स्लीपिंग आवर्स कहते हैं, तो वहीं सुबह 6 बजे से रात के 10 बजे को नॉन-स्लीपिंग आवर्स कहा जाता है। नॉन-स्लीपिंग आवर्स में मिडिल बर्थ वाले यात्री को लोअर सीट पर बैठना होता है।

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मिडिल बर्थ - फोटो : Adobe Stock
मिडिल बर्थ में होती है ये परेशानी
ऐसे में अगर मिडिल बर्थ वाला यात्री अगर थका हुआ है और सोना चाहता है तो रिजर्वेशन होने के बावजूद भी उसे ट्रेन में रात 10 बजे तक बैठ कर ही काम चलाना पड़ता है। अगर यात्री रेलवे के इस नियम का पालन नहीं करता है, तो रेलवे उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
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