फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जानना जरूरी: जानबूझकर एंबुलेंस का रास्ता रोकने पर कितने का चालान कटता है? जानें क्या कहता है नियम

Fri, 15 Aug 2025 04:02 PM IST
शिखर बरनवाल यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rules for Blocking Ambulance: अक्सर लोग रास्ते में एंबुलेंस का रास्ता रोक देते हैं, या एंबुलेंस को विशेष महत्व नहीं देते। बता दें कि अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो इसे कानूनी रूप से अपराध माना जाता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
एंबुलेंस - फोटो : Adobe Stock
Penalty For Blocking Ambulance: देश में ट्रैफिक जाम की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, लेकिन इसके बावजूद कई बार कुछ लोग जानबूझकर एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं का रास्ता रोक देते हैं। यह एक बेहद गंभीर और गैर-जिम्मेदाराना आचरण है, जिसकी वजह से किसी मरीज की जान तक जा सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 में सख्त प्रावधान जोड़े हैं ताकि ऐसी लापरवाही को रोका जा सके। इस नियम के तहत, यदि कोई भी वाहन चालक जानबूझकर या लापरवाही से किसी एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड या अन्य आपातकालीन वाहन का रास्ता रोकता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।

यह नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि एंबुलेंस को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए, चाहे ट्रैफिक की स्थिति कैसी भी हो। देखा जाए तो यह सिर्फ एक कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी है। अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि सड़क पर हर गुजरता मिनट किसी के लिए जिंदगी और मौत का सवाल हो सकता है। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग इस नियम को सख्ती से लागू कर रहे हैं ताकि आपातकालीन वाहनों को बिना किसी रुकावट के गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिल सके।
विज्ञापन

2 of 5
ट्रैफिक जाम - फोटो : X/@hawkeye
कानून की धारा 194E के प्रावधान
मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 194E के अनुसार, एंबुलेंस का रास्ता रोकने वाले व्यक्ति पर ₹10,000 का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। जुर्माने के साथ ही, दोषी को छह महीने तक की जेल भी हो सकती है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए है कि लोग इस अपराध की गंभीरता को समझें और ऐसी लापरवाही करने से बचें।
विज्ञापन

3 of 5
एंबुलेंस - फोटो : Adobe Stock
सड़क पर जागरूकता और जिम्मेदारी
ट्रैफिक नियमों का पालन करने और एंबुलेंस को रास्ता देने के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है। सरकार विभिन्न अभियानों के माध्यम से लोगों को इस बारे में शिक्षित करती रहती है कि एंबुलेंस की सायरन सुनते ही उन्हें तुरंत रास्ता देना चाहिए। यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सड़क पर आपातकालीन स्थिति में संवेदनशीलता दिखाए।

ये भी पढ़ें- जरूर जानें: क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रहा है भारत, पीएम मोदी ने कही ये बात
 

4 of 5
एंबुलेंस - फोटो : Adobe Stock
तकनीक की भूमिका
आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन प्रणालियां, जैसे कि इंटेलिजेंट ट्रैफिक लाइट सिस्टम, एंबुलेंस को रास्ता देने में मदद कर रही हैं। कई शहरों में सेंसर-आधारित ट्रैफिक लाइटें एंबुलेंस के आने पर अपने आप हरी हो जाती हैं। यह तकनीक बिना किसी इंसान की मदद के ही आपातकालीन गाड़ियों के लिए रास्ता बनाने की कोशिश करती है।

ये भी पढ़ें- Govt Scheme: 6 महीने पूरे होने से पहले अगर छोड़ दी नौकरी, तो क्या मिलेगा विकसित भारत योजना का लाभ?
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एंबुलेंस - फोटो : Adobe Stock
सार्वजनिक सहयोग की आवश्यकता
इस नियम का पूरी तरह से सफल होना तभी संभव है जब सार्वजनिक सहयोग मिले। केवल कानून बनाना काफी नहीं है, नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। एंबुलेंस को रास्ता देना न केवल कानूनी अनिवार्यता है, बल्कि यह मानवीयता और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें