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खराब फ्रिज ने कराई इतनी बड़ी परेशानी, कंपनी को अब देने होंगे करीब दो लाख रुपये

Mon, 05 Oct 2026 05:13 PM IST
दीक्षा पाठक यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला

सार

 Defective Refrigerator Case: करीब 1.09 लाख रुपये में खरीदा गया फ्रिज बार-बार खराब होने के बाद भी ठीक नहीं हुआ। आठ बार सर्विसिंग और कंप्रेसर बदलने के बावजूद परेशानी बनी रही। मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा तो कंपनी और सर्विस सेंटर को ग्राहक को कुल 1 लाख 99 हजार 999 रुपये देने का आदेश दिया गया।
 
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फ्रिज की खराबी पर कंपनी की मनमानी पड़ी भारी - फोटो : एआई

फ्रिज जैसी चीज घर में खराब हो जाए तो परेशानी बढ़ना तय है। लेकिन अगर बार-बार शिकायत करने और सर्विस कराने के बाद भी समस्या दूर न हो तो मामला और गंभीर हो जाता है। ऐसा ही एक मामला उपभोक्ता आयोग के सामने पहुंचा, जहां खराब फ्रिज को लेकर ग्राहक ने कंपनी के खिलाफ शिकायत की। सुनवाई के बाद आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और उसके  सर्विस सेंटर को ग्राहक को कुल 1 लाख 99 हजार 999 रुपये देने का आदेश दिया है। तो आइए जानते हैं कि पूरी कहानी क्या है।

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फ्रिज की खराबी पर कंपनी की मनमानी पड़ी भारी - फोटो : एआई जनरेटेड

1.09 लाख रुपये में खरीदा था फ्रिज
आयोग में दर्ज शिकायत के मुताबिक गणेश कुमार अग्रवाल ने करीब 1.09 लाख रुपये में एक रेफ्रिजरेटर खरीदा था। कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद फ्रिज ने ठीक से ठंडा करना बंद कर दिया। ग्राहक ने इसकी शिकायत कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर से की। ग्राहक का कहना था कि खराबी दूर करने के लिए फ्रिज की करीब आठ बार सर्विसिंग की गई। इस दौरान उसका कंप्रेसर भी बदला गया और रेफ्रिजरेंट गैस डाली गई। इसके बावजूद फ्रिज की समस्या खत्म नहीं हुई।

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फ्रिज की खराबी पर कंपनी की मनमानी पड़ी भारी - फोटो : एआई जनरेटेड

परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई
शिकायत के अनुसार, बाद में फ्रिज से तेज आवाज आने लगी और वह फट गया। इसके बाद ग्राहक ने कंपनी और अधिकृत डीलर से संपर्क कर खराब फ्रिज को बदलने की मांग की। कंपनी की तरफ से नए फ्रिज का विकल्प दिए जाने की बात सामने आई। इसकी खुदरा कीमत 1लाख 24 हजार 999 रुपये बताई गई थी। हालांकि, ग्राहक को नया फ्रिज नहीं दिया गया। इसके बाद उसने 4 लाख 49 हजार 624 रुपये के मुआवजे की मांग करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर दी।

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फ्रिज की खराबी पर कंपनी की मनमानी पड़ी भारी - फोटो : एआई जनरेटेड

आयोग ने माना ग्राहक को हुई परेशानी
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने उपलब्ध दस्तावेजों और ग्राहक के बयान को देखा। आयोग ने माना कि शिकायत में पर्याप्त आधार है। सर्विस सेंटर की ओर से मामले में मौजूद होने के बावजूद लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया। कंपनी की तरफ से भी सुनवाई के दौरान प्रभावी जवाब नहीं दिया गया। आयोग ने माना कि ग्राहक को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक परेशानी और शारीरिक जोखिम का भी सामना करना पड़ा। इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का मामला माना गया।

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फ्रिज की खराबी पर कंपनी की मनमानी पड़ी भारी - फोटो : एआई जनरेटेड

45 दिन में देना होगा करीब दो लाख रुपये
आयोग ने कंपनी और सर्विस सेंटर को नए फ्रिज की कीमत के तौर पर 1 लाख 24 हजार 999 रुपये, मानसिक परेशानी के मुआवजे के रूप में 50 हजार रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 25 हजार रुपये देने का आदेश दिया। इस तरह कुल रकम 1लाख 99 हजार 999 रुपये होती है। आदेश के मुताबिक यह भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा। तय समय में रकम नहीं देने पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ कानूनी प्रक्रिया के जरिए इसकी वसूली की जा सकती है।

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