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जरूरी खबर: बालिग बेटा भी मांग सकता है माता-पिता से गुजारा भत्ता? कोर्ट के फैसले में समझिए पूरा मामला

Wed, 14 Oct 2026 09:43 AM IST
दीक्षा पाठक यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला

सार

Adult Son Maintenance: सुल्तानपुर की फैमिली कोर्ट ने बालिग बेटे अमन की गुजारा भत्ता मांगने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। पिता ने बेटे के बालिग और काम करने में सक्षम होने का तर्क दिया था। हालांकि, अभी अदालत ने गुजारा भत्ता देने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। कानून के तहत बालिग संतान को भत्ता पाने के लिए तय शर्तें पूरी करनी होती हैं।
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नौकरी नहीं है तो क्या माता-पिता देंगे खर्च? - फोटो : AI

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर अपने पैरों पर खड़ा हो और नौकरी या कारोबार करके अपना खर्च खुद उठाए। लेकिन अगर बेटा बालिग होने के बाद भी बेरोजगार है और अपना खर्च नहीं उठा पा रहा तो क्या वह माता-पिता से गुजारा भत्ता मांग सकता है? उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की एक फैमिली कोर्ट में इसी सवाल से जुड़ा मामला सामने आया है। अदालत ने इस मामले में बेटे की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि उसे गुजारा भत्ता देने का आदेश भी मिल गया है। तो आज की खबर में हम आपको इसी के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।

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अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी आरोपियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा - फोटो : अमर उजाला

क्या है पूरा मामला?
यह मामला अमन नाम के युवक से जुड़ा है। उसके माता-पिता के बीच साल 2006 में विवाद हुआ था, जिसके बाद दोनों का तलाक हो गया। तलाक के बाद माता-पिता ने अलग-अलग शादी कर ली। अमन के पिता जैनुल हक ने अदालत में कहा कि पुराने मामले में हुए समझौते के तहत बेटे के भरण-पोषण को लेकर शर्तें तय की गई थीं। उन्होंने यह भी दलील दी कि वह पहले बेटे के खर्च के लिए पैसे देते रहे हैं।

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निर्णयों में इतना विलंब क्यों? - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

पिता ने क्या कहा?
पिता का कहना था कि अमन अब बालिग हो चुका है और पढ़ा-लिखा भी है। इसके अलावा वह एक दुकान पर ऑनलाइन फॉर्म भरने का काम करता है। ऐसे में वह अपना खर्च खुद उठा सकता है। इसी मामले में अमन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

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lawyer advocate and court - फोटो : adobestock

कोर्ट ने क्या कहा?
मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पिता की आपत्ति खारिज कर दी और अमन की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया। यानी अब इस मामले में आगे सुनवाई होगी। हालांकि, अदालत ने याचिका स्वीकार करके यह नहीं कहा है कि अमन को गुजारा भत्ता जरूर मिलेगा। आगे की सुनवाई में उसे यह साबित करना होगा कि वह अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है और कानून के तहत उसे भत्ता पाने का अधिकार है।

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lawyer advocate and court - फोटो : adobestock

क्या कहता है कानून?
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 144 में भरण-पोषण से जुड़े प्रावधान हैं। इसके तहत बालिग संतान के लिए गुजारा भत्ता पाने की पात्रता कुछ खास शर्तों पर निर्भर करती है। कानून में बालिग संतान के लिए शारीरिक या मानसिक असामान्यता अथवा चोट के कारण अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ होने जैसी शर्त का जिक्र है। इसलिए केवल बेरोजगार होने या नौकरी नहीं मिलने के आधार पर बालिग बेटे को गुजारा भत्ता मिलने की गारंटी नहीं है। अमन के मामले में भी अंतिम फैसला आगे की सुनवाई और सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगा।

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