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AI: कितना ही एडवांस हो जाए एआई, नहीं कर सकता मनुष्य की बराबरी, रोबोट्स को इन बातों में पीछे छोड़ देगा इंसान

Sun, 02 Jul 2023 10:50 AM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Artificial Intelligence - फोटो : Istock
हम एक सिलिकॉन युग में कदम रख चुके हैं। आज के समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बड़ी तेजी से विकास हो रहा है। विकास की इस रफ्तार को देखते हुए कई बड़े उद्योगपति और टेक एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाले 10 या 100 सालों में अगर आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस को बनाने में सफलता मिल जाती है। इस स्थिति में वह इंसानों को बुद्धिमत्ता की दौड़ में पीछे कर सकता है।

स्टीफन हॉकिंग, एलन मस्क और एपल के कॉ-फाउंडर स्टीव वॉजनिएक के मुताबिक एआई का पूर्ण विकास समाज और इंसानियत के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। इसके कई विनाशकारी प्रभाव इंसानियत के ऊपर पड़ सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या सच में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसानों को मानवीय संवेदना, बुद्धिमत्ता और भावनात्मकता के स्तर पर पीछे कर देगा? क्या तकनीक ये चीज करने में सक्षम होगी? आइए जानते हैं -
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Artificial Intelligence - फोटो : Istock

भावनात्मकता के स्तर पर नहीं कर सकता पीछे

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भले ही भविष्य में कितना भी एडवांस हो जाए पर उसके भीतर कभी भावनात्मकता जन्म नहीं ले सकती है। इंसानी भावनात्मकता के पीछे सांस्कृतिक, भौगोलिक और ब्रह्मांडीय तत्वों का एक अनुक्रम जुड़ा है। 
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Artificial Intelligence - फोटो : Istock
ऐसे में किसी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भावनात्मकता को लाना किसी अल्गोरिदम के बस की बात नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस युक्त रोबोट में इंसानों जैसे हाव-भाव की नकल जरूर पैदा किए जा सकते हैं। हालांकि, एआई के भीतर इंसानों की तरह भावनात्मकता को पैदा करना लगभग नामुमकिन है। यह प्रकृति जन्य है।

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Artificial Intelligence - फोटो : Istock

रिश्ते

एक सभ्य समाज की बुनियाद अच्छे रिश्तों पर टिकी होती है। इंसानों की इसी काबिलियत के चलते हमारा विकास का अनुक्रम काफी तेज हुआ और कई विकसित सभ्यताओं ने जन्म लिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इस स्तर पर कभी भी इंसानों की बराबरी नहीं कर सकता है। 
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Artificial Intelligence - फोटो : Istock
अल्गोरिदम भले ही किसी भी तकनीक को यह बता दे कि किस से कैसे बात करनी है और क्या सलूख करना है? हालांकि, वह कभी भी इंसानों की तरह रिश्तों को कैसे निर्वाह किया जाता है? उसे नहीं सीख सकता। यह प्रक्रिया प्रकृति जन्य है। इसे किसी डाटा और अल्गोरिदम के जरिए सेट नहीं किया जा सकता है।
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