फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Alert: देश में हर पांचवीं महिला को ये बीमारी, ध्यान न दिया तो डायबिटीज और मस्तिष्क रोगों का भी हो जाएंगी शिकार

Tue, 24 Dec 2024 12:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आंकड़े बताते हैं कि अकेले भारत में हर पांच में से एक किशोरावस्था की महिला को पीसीओएस की दिक्कत हो सकती है। वैश्विक स्तर पर इसका अनुमान 6% से 21% के बीच है। पीसीओएस के कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं को लेकर विशेषज्ञों ने सावधान किया है। आइए जानते हैं कि ये बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है?
विज्ञापन
1 of 5
महिलाओं में पीसीओएस की समस्या - फोटो : Freepik.com
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) प्रजनन आयु की महिलाओं को प्रभावित करने वाली बहुत आम समस्या है, दुनियाभर की महिलाओं में इसका खतरा देखा जाता रहा है। इस बीमारी के कारण हार्मोनल असंतुलन, अनियमित मासिक धर्म और ओवरी में सिस्ट की दिक्कत हो सकती है, जिसके कारण कई प्रकार के स्वास्थ्य दुष्प्रभावों का जोखिम भी रहता है।

डॉक्टर कहते हैं, ज्यादातर महिलाएं शर्म की वजह से पीसीओएस और इससे होने वाली समस्याएं खुल कर बता नहीं पाती हैं। बीमारी का समय पर निदान और उपचार न होने के कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का जोखिम रहता है।

आंकड़े बताते हैं कि अकेले भारत में हर पांच में से एक किशोरावस्था की महिला को पीसीओएस की दिक्कत हो सकती है। वैश्विक स्तर पर इसका अनुमान 6% से 21% के बीच है। पीसीओएस के कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं को लेकर विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में सभी लोगों को सावधान किया है। अगर इस बीमारी पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये भविष्य में संज्ञानात्मक या बौद्धिक क्षमताओं में कमी का कारण भी बन सकती है। कहीं आपको भी तो पीसीओएस की दिक्कत नहीं है?


ये भी पढ़ें- इस बीमारी से जूझ रही हैं बॉलीवुड अभिनेत्री, नहीं है इसका कोई इलाज; आप भी हो जाएं सावधान
विज्ञापन

2 of 5
पीसीओएस के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के बारे में जानिए

पीसीओएस के कारण होने वाली जटिलताओं के बारे में जानने से पहले ये समझना आवश्यक है कि आखिर ये बीमारी क्या है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीसीओएस प्रजनन आयु की महिलाओं में होने वाली बीमारी है। हार्मोनल परिवर्तन से जुड़ी इस समस्या में आपका मासिक धर्म चक्र प्रभावित हो जाता है। इसमें या तो कई बार पीरियड्स होता ही नहीं या फिर कई दिनों तक होता रह सकता है। इसके अलावा इस बीमारी में आपकी ओवरी (अंडाशय) के बाहरी किनारे पर तरल पदार्थों से भरे छोटे-छोटे सिस्ट हो सकते हैं। पीसीओएस की दीर्घकालिक समस्या के कारण गर्भधारण में भी दिक्कत हो सकती है।

अब हालिया अध्ययन में पीसीओएस और संज्ञानात्मक गिरावट के बीच संबंध देखे गए हैं।
विज्ञापन

3 of 5
याददाश्त से संबंधित समस्या - फोटो : Freepik.com
पीसीओएस के कारण संज्ञानात्मक क्षमताओं में गिरावट

जर्नल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन
में पाया गया है कि 40 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं में पीसीओएस की समस्या मस्तिष्क स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतों का कारण बन सकती है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में  पीसीओएस क्लिनिक के निदेशक और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक हीथर जी. हडलस्टन कहते हैं, हमारे परिणामों से पता चलता है कि पीसीओएस की समस्या से परेशान महिलाओं में जीवन के मध्यकाल में याददाश्त कम होने और सोचने की क्षमता में परिवर्तन का जोखिम देखा गया है। यह जीवन की गुणवत्ता, करियर और वित्तीय सुरक्षा सहित कई स्तरों पर आपको  प्रभावित कर सकता है।

4 of 5
मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

अध्ययन में बताया गया है कि विशेष रूप से 55 वर्ष की औसत आयु वाली महिलाएं जिन्हें पीसीओएस की समस्या थी उन्होंने संज्ञानात्मक परीक्षणों में कम स्कोर हासिल किए।

शोधकर्ताओं ने इन महिलाओं की ब्रेन एमआरआई में मस्तिष्क में मौजूद सफेद पदार्थ में भी परिवर्तन नोटिस किया जो उम्र बढ़ने का संकेत हो सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा जिन महिलाओं में पीसीओएस की समस्या थी उनका कॉग्नेटिव टेस्ट स्कोर भी, बिना पीसीओएस वाली महिलाओं की तुलना में कम था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पीसीओएस की जटिलताओं के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
क्या है निष्कर्ष?

अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर विशेषज्ञों ने कहा, परिणामों की पुष्टि के लिए अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता है, पर ये कहा जा सकता है कि सामान्य सी मानी जाने वाली ये बीमारी महिलाओं की सेहत को कई प्रकार से प्रभावित कर सकती है।

ये बीमारी न सिर्फ बांझपन के सबसे आम कारणों में से एक है, बल्कि इसकी वजह से चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों पर अतिरिक्त बाल होने और समय के साथ टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। पीसीओएस के साथ जिन महिलाओं को अधिक वजन की समस्या है उनमें उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का जोखिम भी अधिक देखा जाता रहा है।



--------------
स्रोत और संदर्भ
Associations of Polycystic Ovary Syndrome With Indicators of Brain Health at Midlife in the CARDIA Cohort

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें