रियो पैरालंपिक खेलों की ऊंची कूद स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीतने वाले 21 वर्षीय मरियप्पन थांगावेलू तमिलनाडु के सलेम जिले के रहने वाले हैं। उनकी मां सब्जियां बेचती हैं। जब मरियप्पन 5 वर्ष के थे तब उनके पैर के ऊपर से बस गुजर गई थी। बस उनके पैर तो कुचल गई लेकिन उनके हौसलों को नहीं रौंद सकी।
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थंगावेलू
- फोटो : getty
एक पैर में परेशानी होने के बावजूद थांगावेलू स्कूल में वॉलीबॉल खेला करते थे। दिव्यांग होने के बावजूद वह स्कूल की वॉलीबॉल टीम के सदस्य थे। उनके स्पोर्ट्स टीचर ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें ऊंची कूद में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया।
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थांगावेलू
15 साल की उम्र में मरियप्पन ने अपनी पहली प्रतियोगिता में भाग लिया और उसमें रजत पदक जीतकर सबको चकित कर दिया। वह साल 2015 में ऊंची कूद में विश्व रैंकिंग में नंबर एक खिलाड़ी बने थे।
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थांगावेलू
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मरियप्पन ट्यूनीशिया ग्रां प्री में 1.78 मीटर की जंप लगाकर स्वर्ण के साथ रियो पैरालंपिक का टिकट हासिल किया था। क्वालिफिकेशन मार्क 1.60 मीटर था और वह उससे कहीं आगे थे।
कुछ साल पहले अपने इलाज के लिए थांगावेलू ने 3 लाख रुपये का लोन लिया था लेकिन वह अबतक इसकी भरपाई नहीं कर पाए हैं। रियो में स्वर्ण पदक जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मरियप्पन थांगांवलू को बधाई दी है।