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Divya Deshmukh: चेस प्लेयर दिव्या का दर्शकों पर गंभीर आरोप, महिला खिलाड़ियों के साथ हो रहे भेदभाव पर दिया बयान

Tue, 30 Jan 2024 02:30 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिव्या ने कहा कि महिला खिलाड़ियों की आम तौर पर कम सराहना की जाती है और अक्सर वे नफरत सहती हैं। महिला खिलाड़ियों की हर अप्रासंगिक चीज पर ध्यान केंद्रित किया जाता है और नफरत की जाती है, जबकि पुरुष खिलाड़ियों को शायद इन चीजों से दूर रखा जाता है।
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दिव्या देशमुख - फोटो : Divya Deshmukh Instagram
भारतीय शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने आरोप लगाया है कि उन्हें नीदरलैंड के विज्क आन जी में हाल में संपन्न टाटा स्टील मास्टर्स टूर्नामेंट में दर्शकों के गलत व्यवहार का सामना करना पड़ा। इंटरनेशनल मास्टर दिव्या ने कहा कि दर्शकों ने टूर्नामेंट के दौरान उनके बालों, कपड़ों और लहजे जैसी अप्रासंगिक चीजों पर ध्यान केंद्रित किया। नागपुर की 18 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय चेस मास्टर, जिन्होंने पिछले साल एशियाई महिला शतरंज चैंपियनशिप जीती थी, ने एक लंबी सोशल मीडिया पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने बताया है कि महिला खिलाड़ियों को नियमित रूप से स्त्री द्वेष का सामना करना पड़ता है।
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दिव्या (दाएं) - फोटो : Divya Deshmukh Instagram
उन्होंने नोट में लिखा, 'मैं पिछले कुछ समय से इस पर ध्यान दिलवाना चाहती थी, लेकिन टूर्नामेंट खत्म होने का इंतजार कर रही थी। मैंने देखा है कि कैसे शतरंज में महिलाओं को अक्सर दर्शकों द्वारा हल्के में लिया जाता है। इसका सबसे हालिया उदाहरण टाटा स्टील मास्टर्स टूर्नामेंट है। मैंने कुछ मैच खेले जो मुझे लगा कि काफी अच्छे थे और मुझे उन पर गर्व है।
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दिव्या देशमुख - फोटो : Divya Deshmukh Instagram
दिव्या ने लिखा, 'मुझे लोगों ने बताया कि कैसे दर्शकों को खेल से कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि वे खेल के अलावा दुनिया की हर एक चीज पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। जैसे मेरे कपड़े, बाल, लहजा और हर दूसरी अप्रासंगिक चीज।' दिव्या टाटा स्टील मास्टर्स में चैलेंजर्स वर्ग में 4.5 के स्कोर के साथ 12वें स्थान पर रहीं। उन्होंने कहा कि पुरुष खिलाड़ियों को उनके खेल के लिए स्पॉटलाइट मिल रहा था, जबकि महिलाओं को उन पहलुओं के लिए आंका गया था जिनका शतरंज बोर्ड पर उनकी क्षमता से कोई लेना-देना नहीं था।

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दिव्या देशमुख - फोटो : Divya Deshmukh Instagram
उन्होंने कहा, 'मैं यह सुनकर काफी परेशान थी और मुझे लगता है कि यह दुखद सच्चाई है कि जब महिलाएं शतरंज खेलती हैं तो वे अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर देती हैं कि वे वास्तव में कितनी अच्छी हैं। वे जो खेल खेलती हैं वह उनकी ताकत है। मैं यह देखकर काफी निराश हुई कि मेरे इंटरव्यू में (दर्शकों द्वारा) मेरे खेल को छोड़कर बाकी सब कुछ पर ध्यान दिया गया। बहुत कम लोगों ने इस पर ध्यान दिया कि मैं क्या और कैसे खेलती हूं और यह काफी दुख की बात है।'
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दिव्या देशमुख - फोटो : Divya Deshmukh Instagram
उन्होंने कहा, 'मुझे लगा कि यह एक तरह से अनुचित है क्योंकि अगर मैं किसी पुरुष खिलाड़ी के इंटरव्यू में जाती हूं तो व्यक्तिगत स्तर पर कम आलोचनाएं होती हैं। साथ ही खेल और खिलाड़ी की तारीफ की जाती है। सैलरी के मामले में महिलाओं के खेल में हुई प्रगति के बावजूद, महिला एथलीटों को अभी भी दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है और अक्सर उनसे उनके कपड़े और फैशन के बारे में पूछा जाता है।'
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दिव्या देशमुख - फोटो : Divya Deshmukh Instagram
दिव्या ने कहा कि महिला खिलाड़ियों की आम तौर पर कम सराहना की जाती है और अक्सर वे नफरत सहती हैं। महिला खिलाड़ियों की हर अप्रासंगिक चीज पर ध्यान केंद्रित किया जाता है और नफरत की जाती है, जबकि पुरुष खिलाड़ियों को शायद इन चीजों से दूर रखा जाता है। मुझे लगता है कि महिलाएं हर दिन इसका सामना करती हैं और मैं मुश्किल से अभी 18 साल की हूं। मैंने वर्षों से उन चीजों के लिए नफरत समेत उन चीजों का सामना किया है जो मायने भी नहीं रखते हैं। मुझे लगता है कि महिलाओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।
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