आचार्य चाणक्य
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राजपत्नी गुरोः पत्नी मित्र पत्नी तथैव च
पत्नी माता स्वमाता च पञ्चैता मातरः स्मृता
राजा की पत्नी
आचार्य चाणक्य के अनुसार राजा ही अपनी प्रजा का पालनकर्ता होती है। वह अपनी प्रजा की भलाई के लिए हर एक कार्य करता है। यही कारण है कि राजा को पिता के समान दर्जा दिया जाता है। राजा की पत्नी को सदैव मां के समान आदर देना चाहिए।