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श्री कृष्ण की लीला से सीखें जीवन जीने के चार बड़े गुण

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कृष्ण लीला
भगवान श्री कृष्ण की सुमधुर लीला जीवन से जुड़े सभी दु:खों को दूर कर आत्मिक आनंद देने वाली है। कृष्ण का संपूर्ण जीवन किसी सबक से कम नहीं रहा है। उन्होंने अपने जीवन काल में सभी रिश्तों को बेहद ही सरलता और सहजता के साथ निभाया है। फिर चाहे वह पांडवों से दोस्ती हो या फिर गोपियों से प्यार। आइए जानते हैं श्रीकृष्ण से जुड़ी उन बातों को जो आज भी हमें जीवन जीने का सही तरीका सिखाती हैं — 
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कृष्ण लीला
दोस्ती का रिश्ता
हम बचपन से कृष्ण और सुदामा की दोस्ती के बारे में पढ़ते और सुनते आ रहे हैं। कृष्ण ने कभी अपनी दोस्ती में जात-पात और ऊंच-नीच का भेद नहीं दिखाया है। पद—प्रतिष्ठा या धन कभी भी उनकी दोस्ती में बाधक नहीं बना। उन्होंने आजीवन अपनी मित्रता निभाई। 
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कृष्ण लीला
माता-पिता के प्रति आदर भाव
कृष्ण के असली माता-पिता यशोदा और नंद थे, लेकिन उनका पालन-पोषण वासुदेव और देवकी ने किया था। कृष्ण ने अपनी दोनों माताओं का स्थान अपने जीवन में एक सामान रखा। सभी को एक समान आदर और सम्मान कैसे दिया जाता है, यह भगवान कृष्ण से सीखा जा सकता है। 

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कृष्ण लीला
गुरु के प्रति स्नेह
कृष्ण की लीला को देखने के बाद हमें भले ही लगे कि भगवान कृष्ण हमेशा अपने दोस्तों और कार्य में व्यस्त रहते थे, लेकिन इन सभी के साथ वह अपने गुरुओं का सम्मान करना कभी नहीं भूलते थे। श्रीकृष्ण हमेशा अपने गुरुओं के प्रति आदर भाव रखते थे। 
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कृष्ण लीला
प्रेमिका के प्रति प्यार
कृष्ण के चाहने वालों की कमी नहीं थी, लेकिन वृदांवन में राधा के लिए उनका प्रेम सच्चा था। जबकि राधा के साथ ही तमाम गोपियां भी भगवान कृष्ण को बहुत प्यार करती थीं। आज के दौर में लोगों को कृष्ण से प्यार और सम्मान का अमूल्य गुण अवश्य सीखना चाहिए। 
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