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Shaheed Diwas 2020: भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के जीवन से सीखें ये पांच बड़ी बातें

Mon, 23 Mar 2020 02:11 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजालां
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शहीद दिवस 2020
23 मार्च का दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। साल 1931 को आज ही के दिन भारत में ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकन में अपना अहम किरदार निभाने वाले तीन महान क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर लटकाया गया था। उनकी याद में हर साल 23 मार्च को बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि उनके बलिदान को देश हमेशा याद रखे। 
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bhagat singh
जब भगत सिंह को फांसी पर चढ़ाया गया उस समय भगत सिंह महज 23 साल के थे। लेकिन उनके क्रांतिकारी विचार बहुत व्यापक और आला के दर्जे के थे। न केवल उनके विचारों ने लाखों भारतीय युवाओं को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया, बल्कि आज भी उनके विचार युवाओं का मार्गदर्शन करते हैं। 
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bhagat singh
इंकलाब का नारा बुलंद करने वाले भगत सिंह अपने आखिरी समय में भले ही अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों में जकड़े थे लेकिन उनके विचार आजाद थे वे कहते थे कि बेहतर जिंदगी सिर्फ अपने तरीकों से जी जा सकती हैं। यह जिंदगी आपकी है और आपको तय करना है कि आपको जीवन में क्या करना है। भगत सिंह कहा करते थे, मैं एक ऐसा पागल हूं, जो जेल में भी आजाद है और मेरी गर्मी से ही् राख का हर एक कण गतिमान हैं।

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bhagat singh - फोटो : सोशल मीडिया
भगत सिंह जीवन के लक्ष्य को महत्व देते थे। उनका मानना था कि हमें अपने जीवन का लक्ष्य पता होना चाहिए। अगर हमें अपने लक्ष्य का पता होगा और हम अपने लक्ष्योन्मुख  से कार्य करेंगे तो हमें सफल होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती है।
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bhagat singh
परिवर्तन या बदलाव को लेकर उनके विचार सकारात्मक थे। वे मानते ते कि हमें बदलाव से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। वे रूढ़िवादी विचारों के लिए कहते थे कि हमें किसी चीज का आदि नहीं होना चाहिए। 
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भगत सिंह
वतन के लिए त्याग और बलिदान उनके लिए सर्वोपरि रहा। वे कहते थे कि एक सच्चा बलिदानी वही है जो जरुरत पड़ने पर सब कुछ त्याग दे। भगत सिंह स्वयं अपनी निजी जिंदगी से प्रेम करते थे, उनकी भी महत्वाकांक्षाएं थी, सपने थे। लेकिन वतन पर उन्होंने अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। 
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bhagat singh
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के जीवन से हमें देशभक्ति की प्रेरणा मिलती है। साथ में उन महान क्रांतिकारियों के जीवन से हम यह भी सीख सकते हैं कि अगर देश की आन, बान और शान के खिलाफ कोई ताकत खड़ी होती है तो हमें बल के साथ-साथ वैचारिक रूप से भी उसे कुचलने की आवश्यकता है। क्योंकि विचार कभी मरते नहीं है। बेशक इसके लिए गहन अध्ययन की भी आवश्यकता होती है।
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